देश की खबरें | उत्तरकाशी हिमस्खलन के बाद फिर शुरू हुई बहस, कारणों को लेकर विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में द्रौपदी का डांडा-द्वितीय शिखर के पास हाल ही में हुए हिमस्खलन में कम से कम 26 पर्वतारोहियों की मौत के बाद इसके (हिमस्खलन के) कारकों को लेकर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है।

देहरादून, आठ अक्टूबर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में द्रौपदी का डांडा-द्वितीय शिखर के पास हाल ही में हुए हिमस्खलन में कम से कम 26 पर्वतारोहियों की मौत के बाद इसके (हिमस्खलन के) कारकों को लेकर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है।

हालांकि संभावित कारणों को लेकर कोई आम राय नहीं है, लेकिन उनमें से ज्यादातर को लगता है कि हिमस्खलन के दो दिन पहले उत्तरकाशी में आये भूकंप को जिम्मेदार ठहराया जाना गलत है।

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के एक वैज्ञानिक ने कहा कि दो अक्टूबर को उत्तरकाशी में रिक्टर पैमाने पर 2.5 तीव्रता का भूकंप आया था, यह बहुत हल्का था और इसका केंद्र हिमस्खलन स्थल से बहुत दूर था।

संस्थान के वैज्ञानिक मनीष मेहता ने कहा, ‘‘हिमस्खलन से दो दिन पहले कम तीव्रता का भूकंप आया था और इसका केंद्र एक गांव में था, जिसकी चोटी से हवाई दूरी लगभग 25 किमी है, तो इस बात की कम संभावना है कि भूकंप के कारण हिमस्खलन हुआ था।’’

एक अन्य विशेषज्ञ ने हिमस्खलन के लिए क्षेत्र में अधिक बर्फबारी को जिम्मेदार ठहराया है।

इस बार ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में हिमपात अधिक हुआ है और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण ढलानों पर जमी ताजा बर्फ हिमस्खलन के रूप में नीचे खिसक सकती है।

गत 22 सितंबर से 11 दिनों में पड़ोसी केदारनाथ घाटी में हिमस्खलन की तीन घटना हुयी ।

तीनों में से, नवीनतम हिमस्खलन एक अक्टूबर को चोराबाड़ी ग्लेशियर में केदारनाथ मंदिर से सिर्फ पांच किमी दूर हुआ, लेकिन इन हिमस्खलन में किसी को नुकसान नहीं हुआ।

उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक एमपीएस बिष्ट ने कहा, ‘‘ताजा हिमस्खलन तेज हवाओं के कारण भी हो सकता है। इसलिए, कोई भी उत्तरकाशी में हिमस्खलन का केवल एक कारण नहीं बता सकता है।’’

उन्होंने कहा कि हिमस्खलन को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में ट्रेकिंग या पर्वतारोहण के दौरान सावधानी और सुरक्षा के उपाय किए जा सकते हैं।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) के रजिस्ट्रार विशाल रंजन ने कहा कि टीम का हिस्सा रहे घायल प्रशिक्षुओं ने बताया कि यह एक हिमखंडस्खलन था।

एनआईएम के पूर्व प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि हिमखंडस्खलन आमतौर पर ढलानों पर होता है।

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