देश की खबरें | अदालत ने मामला दर्ज होने में देरी के लिए फटकार लगायी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक विशेष अदालत के समक्ष लंबित एक मामले को खारिज करते हुए कार्रवाई करने में अनावश्यक देरी करने के लिए अधिकारियों को फटकार लगायी है, जिससे आरोपी सजा से बच जाते हैं।
बेंगलुरु, आठ अक्टूबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक विशेष अदालत के समक्ष लंबित एक मामले को खारिज करते हुए कार्रवाई करने में अनावश्यक देरी करने के लिए अधिकारियों को फटकार लगायी है, जिससे आरोपी सजा से बच जाते हैं।
औषधि निरीक्षक-1 बेंगलुरु द्वारा औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत मामला एक प्रयोगशाला रिपोर्ट मिलने के पांच साल सात महीने बाद दर्ज किया गया, जिसमें कहा गया था जो ‘फॉलिक एसिड’ के लिए बेची जा रही दवा ‘‘मानक गुणवत्ता की नहीं थी।’’
उच्च न्यायालय ने कंपनी और उसके दो निदेशकों द्वारा दायर वह याचिका स्वीकार कर ली जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ मामले को खारिज करने का अनुरोध किया था।
अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले में, प्रयोगशाला से नमूने की रिपोर्ट प्राप्त होने के पांच साल और 7 महीने बाद मामला दर्ज किया जाता है। इसलिए, इस तरह की देरी को माफ नहीं किया जा सकता जो वैधानिक रोक उत्पन्न करती है।’’
मेसर्स एमक्योर फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, इसके प्रबंध निदेशक सतीश रमनलाल मेहता और निदेशक महेश नाथलाल शाह ने अपनी याचिका के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। पांच जनवरी 2012 को औषधि निरीक्षक ने तुलसी फार्मा का दौरा किया था और एमक्योर द्वारा निर्मित एक दवा का नमूना लिया था। नमूने को जांच के लिए बेंगलुरु स्थित औषधि जांच प्रयोगशाला भेजा गया था।
जनवरी, 2012 की रिपोर्ट में कहा गया था कि दवा ‘‘मानक गुणवत्ता की नहीं थी।’’ कंपनी को नोटिस और पत्र भेजे गए, जिसने आरोप से इनकार किया। औषधि निरीक्षक ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए औषधि नियंत्रक से अनुमति मांगी। आठ दिसंबर, 2017 को औषधि नियंत्रक ने आवश्यक अनुमति दी।
मामला दो जनवरी, 2018 को दर्ज किया गया। आर्थिक अपराधों के लिए विशेष अदालत ने देरी को माफ कर दिया और 20 मार्च, 2018 को अपराध का संज्ञान लिया।
आरोपी ने सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उसने भी देरी को माफ कर दिया। इसके बाद कंपनी और निदेशकों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने हाल ही में अपना फैसला सुनाया।
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