जयपुर, 24 अगस्त राजस्थान उच्च न्यायालय ने बसपा के छह विधायकों के सत्ताधारी कांग्रेस में विलय के खिलाफ दायर भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका का सोमवार को निपटारा करते हुए राज्य विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि वह विधायक की शिकायत पर सुनवाई करें।
अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि इस मामले को गुण-दोष के आधार पर तीन महीने के अंदर निपटाया जाये।
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दिलावर की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के 22 जुलाई के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें उन्होंने अयोग्यता को लेकर मार्च में दायर याचिका को खारिज कर दिया था।
न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार गोयल की एकल पीठ ने इस मामले में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) द्वारा दायर एक अन्य रिट याचिका को भी खारिज कर दिया, हालांकि उसे विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता के लिये याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी।
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दिलावर ने बसपा के छह विधायकों संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेंद्र अवाना और राजेंद्र गुढ़ा के कांग्रेस में विलय को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी आदेश के अमल पर रोक की मांग की थी।
दिलावर की याचिका पर अदालत के आदेश में कहा गया, “इस याचिका को उस सीमा तक आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 22.7.2020 को दिया गया आदेश खारिज कर दरकिनार किया जाता है। विधानसभा अध्यक्ष के याचिकाकर्ता द्वारा अयोग्यता के लिये दायर याचिका पर आज की तारीख से तीन महीने के अंदर फैसला लिये जाने की उम्मीद है।”
आदेश में कहा गया, “मांगी गई अन्य रियायतों को खारिज किया जाता है। इसी के अनुरूप याचिका को निस्तारित किया जाता है।”
इसबीच शीर्ष अदालत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर दिलावर की याचिका को अब निरर्थक बताते हुये इसका निस्तारण किया।
भाजपा विधायक ने राजस्थान में बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस विधायक के रूप में काम करने की इजाजत देने के विधान सभा अध्यक्ष के फैसले पर रोक के लिये उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सूचित किया कि उच्च न्यायालय ने आज सवेरे भाजपा विधायक दिलावर की याचिका पर आदेश पारित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने विधान सभा अध्यक्ष से कहा है कि बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ याचिका पर उसके गुण दोष के आधार पर फैसला किया जाये।
उच्च न्यायालय में विधानसभा अध्यक्ष का पक्ष रखने वाले वकील ने जयपुर में अदालत के बाहर संवाददाताओं को बताया , ‘‘ अदालत ने मदन दिलावर की याचिका का निपटारा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से 16 मार्च को दर्ज की गई शिकायत पर सुनवाई करने और तीन महीने के अंदर इसे गुण-दोष के आधार पर निपटाने को कहा है।’’
उल्लेखनीय है कि 2018 के चुनाव में संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेंद्र अवाना और राजेंद्र गुधा बसपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे थे।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक अवाना ने कहा, “मैं अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं। यह सच्चाई की जीत है।”
उन्होंने पिछले साल 16 सितम्बर 2019 को कांग्रेस में एक समूह के रूप में विलय के लिए अर्जी दी थी। विधानसभा स्पीकर ने अर्जी के दो दिन बाद 18 सितम्बर 2019 को आदेश जारी कर घोषित किया कि इन छह विधायकों से कांग्रेस के अभिन्न सदस्य की तरह व्यवहार किया जाए।
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