देश की खबरें | ताशकंद में हुए सम्मेलन में अफगानिस्तान के समक्ष चुनौतियों पर चर्चा की गई

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नयी दिल्ली, 26 जुलाई उज़्बेकिस्तान के ताशंकद में अफगानिस्तान के संकट पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के एजेंडे में अफगानिस्तान के समक्ष सुरक्षा, स्थिरता और नाजुक आर्थिक स्थिति समेत कई चुनौतियां सबसे ऊपर रहीं।

मंगलवार को संपन्न हुए इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले 20 देशों में भारत भी शामिल था।

अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी ने सम्मेलन में तालिबान के शासन की नुमाइंदगी की।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि इस चर्चा में भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिस्सा लिया और साफ किया कि भारत का प्रतिनिधित्व जेपी सिंह ने नहीं किया है जो विदेश मंत्रालय में अफगानिस्तान से संबंधित मामलों के अधिकारी हैं। इस तरह की खबरें थी कि जेपी सिंह सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री वी नोरोव ने सम्मेलन में कहा, “ मुझे विश्वास है कि यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के संयुक्त दृष्टिकोण के विकास में योगदान देगा, जिसमें अफगानिस्तान में स्थिरता, सुरक्षा और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को उबारने के मुद्दों को बढ़ावा मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि उज़्बेकिस्तान शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और समृद्ध राज्य के तौर पर अफगानिस्तान के विकास में दिलचस्पी रखता है।

सम्मेलन से पहले उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस सम्मेलन का मकसद आतंकवाद का मुकाबला करने में विश्व समुदाय का साझा रुख बनाना और काबुल की मौजूदा सरकार और अफगानिस्तान के पड़ोसियों के बीच रचनात्मक बातचीत सुनिश्चित करना है।

भारत अफगानिस्तान की स्थिति पर कई प्रमुख शक्तियों के संपर्क में रहा है।

भारत ने पिछले महीने काबुल में अपनी राजनयिक मौजूदगी को फिर से स्थापित किया और अफगानिस्तान की राजधानी में स्थित अपने दूतावास में ‘तकनीकी टीम’ तैनात की।

भारत ने पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद सुरक्षा कारणों से दूतावास से अपने अधिकारियों को वापस बुला लिया था।

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