देश की खबरें | मीडियावन पर प्रतिबंध से जुड़े केंद्र के आदेश पर रोक एक दिन और बढ़ाई गई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल उच्च न्यायालय ने मलयालम न्यूज चैनल मीडियावन के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के आदेश के कार्यान्वयन पर अंतरिम रोक सोमवार को एक और दिन के लिए बढ़ा दी।

कोच्चि, सात फरवरी केरल उच्च न्यायालय ने मलयालम न्यूज चैनल मीडियावन के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के आदेश के कार्यान्वयन पर अंतरिम रोक सोमवार को एक और दिन के लिए बढ़ा दी।

न्यायमूर्ति एन नागरेश ने अंतरिम आदेश की अ‍वधि बढ़ाते हुए मध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं पर फैसला भी सुरक्षित रख लिया। मध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड मीडियावन का संचालन करती है। इसके कर्मचारियों और एक पत्रकार संघ ने चैनल के प्रसारण पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी है।

अदालत ने कहा कि वह मामले में आठ फरवरी को फैसला सुनाएगी।

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि एक बार मिली सुरक्षा मंजूरी हमेशा के लिए जारी नहीं रह सकती।

सहायक सॉलिसिटर जनरल वी मनु ने अदालत में ट्रेड यूनियन और कर्मचारियों द्वारा दायर याचिकाओं का भी विरोध किया और कहा कि मामला केंद्र सरकार व कंपनी के बीच है।

मनु ने दलील दी कि कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन की दलीलें सुनवाई योग्य नहीं हैं।

केंद्र सरकार ने पहले अदालत को बताया था कि गृह मंत्रालय ने खुफिया सूचनाओं के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं के मद्देनजर मीडियावन को सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।

हालांकि, दूसरी ओर मीडियावन ने तर्क दिया था कि गृह मंत्रालय की मंजूरी केवल नई अनुमति/लाइसेंस के समय जरूरी थी, नवीनीकरण के समय नहीं।

चैनल ने यह भी कहा था कि अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग दिशा-निर्देशों के अनुसार, सुरक्षा मंजूरी केवल नई अनुमति के लिए आवेदन करने के समय जरूरी थी, न कि लाइसेंस के नवीनीकरण के समय।

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (केयूडब्ल्यूजे), मीडियावन के संपादक प्रमोद रमन और चैनल के कुछ कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि अगर केंद्र के फैसले को रद्द नहीं किया जाता है तो चैनल के सैकड़ों कर्मचारी रोजगार से वंचित हो जाएंगे। इन सबका प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता जाजू बाबू ने किया।

पत्रकार संघ और चैनल के कर्मचारियों ने तर्क दिया है कि किसी अनुमति या अधिनियम या नियमों के उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया गया है, लिहाजा केंद्र सरकार द्वारा की गई कार्रवाई ‘अवैध और असंवैधानिक’ है।

केंद्र ने 31 जनवरी को चैनल के प्रसारण पर रोक लगा दी थी और इसके कुछ ही घंटों के भीतर चैनल ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसने आदेश को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया था।

दो फरवरी को अंतरिम रोक की अ‍वधि सात फरवरी तक के लिए बढ़ा दी गई थी।

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