देश की खबरें | ‘‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’’ के निर्माण के दौरान पेड़ों को काटे जाने का कार्य अवैध था: एनजीटी

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नयी दिल्ली, 15 फरवरी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि मध्य प्रदेश में ओंकारेश्वर के पास ‘‘‘एकात्मता प्रतिमा’’ (स्टैच्यू ऑफ वननेस) के निर्माण के दौरान एक न्यास द्वारा करीब 1,300 पेड़ों को काटना ‘‘अवैध’’ था।

एनजीटी ने यह भी कहा कि पेड़ों की कटाई के लिए केंद्र सरकार से अनुमति की आवश्यकता होती है। एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसके अनुसार परियोजना प्रस्तावक, आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास ने परियोजना के निर्माण के दौरान पेड़ों को काट दिया था। न्यास की स्थापना 2017-18 में हुई थी। यह मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम के तहत आता है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अधिकरण ने पूर्व में एक समिति का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट में राज्य के अधिनियम के तहत एक उप संभागीय अधिकारी (एसडीओ) से अनुमति मिलने के बाद लगभग 1,300 पेड़ों को काटे जाने की बात कही थी। पीठ ने कहा कि एसडीओ की अनुमति केंद्र सरकार की अनुमति का विकल्प नहीं है।

एनजीटी ने कहा कि वन (संरक्षण) अधिनियम ने राज्य के कानून की जगह ले ली है। पीठ ने कहा, ‘‘हम मानते हैं कि पेड़ों की कटाई अवैध थी, जिसके लिए कार्रवाई में उचित मुआवजा और वनीकरण शामिल है।’’

पीठ ने कहा कि परियोजना के लिए, नर्मदा नदी के बाढ़ संभावित क्षेत्र में सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने थे। अधिकरण ने कहा, ‘‘कानून की उचित प्रक्रिया यानी केंद्र सरकार की अनुमति के बिना और पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती है।’’

याचिका के अनुसार, निर्माण के दौरान बिना किसी सुरक्षा उपाय के भारी मशीनरी के साथ जमीन खोदी गई थी और नर्मदा में मलबा डाला गया जिससे जलीय जीवन को नुकसान हुआ।

पिछले साल फरवरी में, मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने 2,141.85 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके तहत ओंकारेश्वर में एक संग्रहालय और अन्य बुनियादी ढांचे के साथ आदि शंकराचार्य की 108 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जानी है। राज्य सरकार ने प्रतिमा को ‘‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’’ का नाम दिया है।

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