देश की खबरें | लद्दाख में टेक्टोनिक फॉल्ट लाइन सक्रिय :अध्ययन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लद्दाख में जिस फॉल्ट लाइन पर भारत और एशियाई प्लेटें जुड़ी हैं, उसे टेक्टोनिक रूप से सक्रिय पाया गया है। एक नये अध्ययन में यह बात सामने आई है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर लद्दाख में जिस फॉल्ट लाइन पर भारत और एशियाई प्लेटें जुड़ी हैं, उसे टेक्टोनिक रूप से सक्रिय पाया गया है। एक नये अध्ययन में यह बात सामने आई है।

टेक्टोनिक प्लेटें पृथ्वी की परत और सबसे ऊपर वाले आवरण का हिस्सा होती हैं।

यह भी पढ़े | Durga Puja 2020: बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले 2 पुलिसवालों की COVID-19 से मौत.

नये अध्ययन में ‘इंडस सूचर जोन (आईएसजेड)’ में दूर तक फॉल्ट की बात सामने आई है जो हाल ही में टेक्टोनिक रूप से सक्रिय हुआ है। इसके बाद नयी तकनीकों और व्यापक भूवैज्ञानिक डेटाबेस का इस्तेमाल करते हुए मौजूदा मॉडलों पर गंभीरता से पुनर्विचार की जरूरत महसूस की गयी है।

ये अध्ययन भूकंप के अध्ययन, पूर्वानुमान और पर्वतीय श्रृंखलाओं के भूकंपीय ढांचे को समझने में भी बड़े प्रभाव डाल सकता है।

यह भी पढ़े | दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष एवं जल मंत्री सतेंद्र जैन ने तिमारपुर व भलस्वा झील साइट का किया निरीक्षण, रोहिणी, रिठाला, कारोनेशन वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का भी किया दौरा.

‘इंडस-सांगपो सूचर जोन’ भारतीय प्लेट की वह सीमा है, जहां वह एशियाई प्लेट से मिलती है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाले वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के एक समूह ने पता लगाया है कि जिस जोड़ या ‘सूचर’ को परंपरागत तरीके से बंद समझा जाता था, वह टेक्टोनिक रूप से सक्रिय है।

वैज्ञानिकों ने हिमालय के भीतरी क्षेत्र में स्थित लद्दाख के दूरदराज के इलाकों का मानचित्रण किया। अध्ययन का प्रकाशन हाल ही में पत्रिका ‘टेक्नोफिजिक्स’ में किया गया है।

शोधपत्र के सह-लेखक कौशिक सेन ने कहा, ‘‘हमने देखा कि इस इलाके में फॉल्ट बहुत सक्रिय है, इसलिए फॉल्ट क्षेत्रों में चट्टानें बहुत कमजोर हैं। इसलिए भूस्खलन के लिहाज से इसका बहुत प्रभाव है। यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से भी सक्रिय है, लेकिन यह सक्रियता बहुत कम से मध्यम स्तर की है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर सिंधु नदी के साथ-साथ चलने वाली इस फॉल्ट लाइन पर कभी भारी बारिश होती है तो भूस्खलन का खतरा अधिक होता है।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\