देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने उप्र पीएसी जवान को दी राहत, नियुक्ति को किया बहाल

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नयी दिल्ली, 23 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबलरी (पीएसी) को उस व्यक्ति को कांस्टेबल के पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया है जिसका चयन 2005 में आपराधिक मामले की सूचना कथित रूप से छिपाने पर रद्द कर दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने रेखांकित किया कि जब व्यक्ति ने 12 फरवरी 2004 को नौकरी के लिए आवेदन दिया था तब उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। लेकिन आवेदन जमा करने के पांच दिन बाद उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया। हालांकि, सितंबर, 2004 में अधीनस्थ अदालत ने उसे बरी कर दिया।

न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने बृहस्पतिवार को दिए फैसले में कहा, ‘‘ चीजों को खुलासा नहीं करने के मामले को व्यापक तौर पर अयोग्यता के रूप में पेश करना अनुचित होगा तथा इस महान, विशाल एवं विविधता वाले देश में जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ना होगा।’’

पीठ ने कहा कि चयनित होने के बाद संबंधित व्यक्ति को अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि, यदि कोई है तो, का खुलासा करते हुए हलफनामा देना था और उसने अक्टूबर, 2004 में हलफनामा दिया भी और कहा कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला कभी दर्ज नहीं हुआ।

उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि इस मामले में आवेदक को बरी किये जाने के अधीनस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ कोई अपील नहीं की गयी।

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले को दरकिनार कर दिया। उच्च न्यायालय ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया था। एकल पीठ ने व्यवस्था दी थी कि आपराधिक मामले में उसके बरी हो जाने से वह सूचना छिपाने के दोष से मुक्त नहीं हो जाता।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘ मामले से जुड़े तथ्य तथा ऊपर वर्णित विशेष परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में दुर्भाग्यपूर्ण आपराधिक मामले (जिसमें आरोपी को बरी किया गया) के खुलासे का कोई औचित्य है? मामले के विशिष्ट तथ्यों को देखते हुए हमारी राय में हमें नहीं लगता कि यह अपीलकर्ता (रवींद्र कुमार) के लिए घातक हो सकता है।’’

फैसले में कहा गया है कि प्रत्येक मामला मौजूद तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अदालत को एक मार्गदर्शक के रूप में उपलब्ध पूर्व उदाहरणों के साथ वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा।

अदालत ने कहा, ‘‘ यह कभी भी सभी परिदृश्यों के लिए एक समान नहीं हो सकता।’’

याचिकाकर्ता की अपील को स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के एकल पीठ एवं खंडपीठ के आदेश को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने पीएसी की 27 वीं बटालियन (सीतापुर) के कमांडेंट के 12 अप्रैल, 2005 के आदेश को भी खारिज कर दिया जिसमें उसके चयन को रद्द कर दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने पीएसी प्रशासन को आवेदक को कांस्टेबल के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया।

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