देश की खबरें | मुर्गी पालन की उत्पत्ति का पता लगाने के लिये अध्ययन किया गया
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कोलकाता, 30 जून भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (जेडएसआई) के एक शोधकर्ता ने प्रतिष्ठित वैश्विक संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक अध्ययन कर सदियों से किये जा रहे मुर्गी पालन की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला है।
इस अध्ययन में घरेलू मुर्गियों और जंगल फाउल (जेएफ) दोनों प्रजातियों के वैश्विक नमूने के सबसे बड़े संपूर्ण जीन समूह अनुक्रमण डेटासेट का उपयोग किया गया।
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जेडएसआई के मुकेश ठाकुर ने विभिन्न वैश्विक संस्थानों के तीन अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह अध्ययन किया ।
अध्ययन ने गैलस वंश की चार प्रजातियों, रेड जंगल फाउल की पांच उप-प्रजातियों और दुनिया भर से एकत्रित की गई मुर्गी की विभिन्न घरेलू नस्लों से 863 जीन समूहों का डीएनए अनुक्रमण किया।
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ठाकुर ने अध्ययन को लेकर एक नोट में कहा, ''हमने सभी पांच उप प्रजातियों, 12 ग्रीन जंगल फ़ॉल्स, दो ग्रे जंगल फ़ॉल्स और चार सीलोन जंगल फ़ॉल्स का प्रतिनिधित्व करते हुए 142 लाल जंगल फ़ॉल्स प्राप्त किए और अनुक्रमित किया।''
उन्होंने कहा, ''... हमारा डेटा, पहली बार, स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि सभी पांच लाल जंगल फाउल उप-प्रजातियां लगभग 50,000 साल पहले से (मुर्गी पालन से बहुत पहले) से आनुवंशिक रूप से भिन्न हैं।
अध्ययन में कहा गया है कि घरेलू मुर्गियां आरंभ में उप-प्रजाति रेड जंगल फाउल (आरजेएफ) - "गैलस गैलस स्पाइसिसस" से निकलीं। इनका क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी चीन, उत्तरी थाईलैंड और म्यांमा पर केन्द्रित था।
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