देश की खबरें | सुधार परीक्षा देने वाले छात्र को भी नियमित छात्रों की तरह समझा जाये: उच्च न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि कोविड-19 के मद्देनजर केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षाओं के रद्द होने के कारण छात्रों का आकलन करने के लिए मंजूर की गई व्यवस्था सुधार परीक्षाएं देने वाले छात्रों पर भी लागू होगी क्योंकि वे भी महामारी से एक समान पीड़ित हैं।
नयी दिल्ली, 20 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि कोविड-19 के मद्देनजर केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षाओं के रद्द होने के कारण छात्रों का आकलन करने के लिए मंजूर की गई व्यवस्था सुधार परीक्षाएं देने वाले छात्रों पर भी लागू होगी क्योंकि वे भी महामारी से एक समान पीड़ित हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि नियमित छात्रों की तरह, जो लोग सुधार परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे, वे भी आकलन योजना के अनुसार प्राप्तांक का लाभ उठाने के हकदार होंगे या सीबीएसई द्वारा आयोजित वैकल्पिक परीक्षा के लिए उपस्थित होंगे।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा, ‘‘छात्र ने पूरे एक वर्ष का त्याग किया और साथ ही दो विषयों में अपने अंकों में सुधार किया, जो कि पिछले वर्ष में अर्जित अंक से अधिक थे, अदालत की राय में, ऐसा कोई कारण नहीं है कि नियमित छात्रों से अलग उनके साथ अलग तरह का व्यवहार क्यों होना चाहिए।’’
उच्च न्यायालय का यह आदेश एक उस छात्र संयम गुप्ता की याचिका पर आया है जिसने फरवरी-मार्च, 2019 में 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी और 95.25 प्रतिशत अंक हासिल किये थे।
इसके बाद, अपने अंक में सुधार करने के लिए, उन्होंने एक वर्ष छोड़ दिया और 2020 में सुधार परीक्षा के लिए अकाउंटेंसी, अंग्रेजी कोर, अर्थशास्त्र और बिजनेस स्टडीज की परीक्षाएं फिर से देना का फैसला किया।
अन्य परीक्षाएं हालाकि तय कार्यक्रम के अनुसार हुई लेकिन 24 मार्च को प्रस्तावित बिजनेस स्टडीज परीक्षा को कोविड-19 के कारण लगाये गये लॉकडाउन के कारण रद्द कर दिया गया था।
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