नयी दिल्ली, 24 मार्च केरल से ताल्लुक रखने वाले कुछ विपक्षी सांसदों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि उनके राज्य की एक परियोजना के विरोध में आज मार्च निकालने के दौरान संसद के निकट पुलिस ने उन्हें जबरन रोका तथा ‘धक्कामुक्की एवं पिटाई की।’
बहरहाल, दिल्ली पुलिस ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि पुलिसकर्मियों ने किसी सांसद के साथ धक्कामुक्की नहीं की।
सदन में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सांसद के. सुरेश और आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने यह विषय उठाया।
सुरेश ने कहा, ‘‘आज सुबह कुछ महिला सदस्यों समेत करीब 10 सांसदों ने विजय चौक से संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा तक के लिए विरोध मार्च निकाला था। यह विरोध मार्च केरल की सिल्वरलाइन परियोजना (राज्य सरकार की रेल परियोजना) को लेकर था जिसका विरोध पिछले कई दिनों से केरल में हो रहा है। विरोध मार्च निकालने के बाद पुलिस ने हमें रोक लिया और संसद में घुसने नहीं दिया।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘पुलिसकर्मियों ने हमारे साथ धक्कामुक्की की, पिटाई की और निर्मम हमला किया।’’
सुरेश के अनुसार, सांसदों ने पुलिस को बताया कि वे संसद सदस्य हैं तथा विरोध और नारेबाजी करना उनका अधिकार है, इसके बावजूद पुलिस ने रोका जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रेमचंद्रन ने कहा, ‘‘यह विशेषाधिकार का मामला बनता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस का क्या अधिकार है कि वह सांसदों को संसद में प्रवेश करने से जबरन रोके।’’
इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, ‘‘मैं चैम्बर में बुलाकर आपसे घटनाक्रम के बारे में बात करूंगा। फिर संबंधित अधिकारियों से भी बात करूंगा।’’
कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने राज्यसभा में यह विषय उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय चौक पर प्रदर्शन करने के बाद संसद की ओर लौट रहे विपक्षी सांसदों के साथ दिल्ली पुलिस के जवानों ने ‘‘धक्कामुक्की’’ की।
राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने वेणुगोपाल से कहा कि वह इस घटना की विस्तृत जानकारी उन्हें भेजें ताकि वह आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
उधर, दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता सुमन नलवा ने कहा, ‘‘कुछ लोग मीडिया लॉन से मलयालम में नारेबाजी करते हुए उत्तरी हिस्से में फव्वारे वाले अवरोधक तक पहुंचे। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने रोका। उन्होंने कहा कि वे सांसद हैं और नारेबाजी करते रहे। उन्हें अपना पहचान पत्र दिखाने को कहा गया जिससे उन्होंने इनकार कर दिया। इस बीच, संसद के गेट नंबर एक से सुरक्षा कर्मचारियों को सांसदों की पहचान के लिए बुलाया गया।’’
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