नयी दिल्ली, 31 मई दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था।
आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार ने एनजीटी के 16 फरवरी के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘‘चुनी हुई सरकार को पूरी तरह से दरकिनार करना’’ है और ठोस कचरे के प्रबंधन के संबंध में अधिकार उपराज्यपाल और केंद्र सरकार को सौंपना है जो संवैधानिक योजना का उल्लंघन है।
केंद्र और ‘आप’ सरकार के बीच जारी विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने कुछ दिन पहले एक अलग याचिका दायर कर एनजीटी के एक अन्य आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उपराज्यपाल को यमुना प्रदूषण पर एक उच्च-स्तरीय समिति (एचएलसी) के अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया था।
वकील शादान फरासत के जरिये दायर याचिका में एनजीटी के 16 फरवरी के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ‘‘उन क्षेत्रों में उपराज्यपाल को दी गई कार्यकारी शक्तियों से खिन्न है, जिन क्षेत्रों में केवल दिल्ली की एनसीटी की निर्वाचित सरकार को ही अधिकार प्राप्त है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘एनजीटी ने उपराज्यपाल को एक समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है, जबकि ऐसी समिति की अध्यक्षता करने के लिए उपराज्यपाल को कोई वैधानिक या संवैधानिक अधिकार प्रदान नहीं किया गया है।’’
एनजीटी द्वारा गठित समिति में दिल्ली सरकार के सिंचाई, वन और पर्यावरण, कृषि और वित्त विभागों के मुख्य सचिव और सचिव शामिल हैं।
इन अधिकारियों के अलावा, समिति में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार में सचिव या उनके नामित व्यक्ति, महानिदेशक (डीजी) वन या उनके नामित व्यक्ति, पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय, कुछ अन्य अधिकारी शामिल हैं।
याचिका में कहा गया है कि महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आदेश के जरिये दिल्ली के उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। इसमें कहा गया है, ‘‘इसके अलावा, एनजीटी द्वारा सुझाए गए अन्य उपायों में नये अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करना, मौजूदा अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्रों को बढ़ाना और पुराने अपशिष्ट केंद्रों में सुधार करना शामिल हैं। इन सभी के लिए बजटीय आवंटन की आवश्यकता होती है जो दिल्ली सरकार/एनसीटी की विधानसभा द्वारा अधिकृत हैं। इसलिए इस संबंध में निर्वाचित सरकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।’’
याचिका में कहा गया है कि जन स्वास्थ्य, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अनुसूची 12 की प्रविष्टि 6 के संदर्भ में हैं, जो इन मुद्दों से निपटने के लिए स्थानीय सरकार यानी दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को अधिकार देती है।
याचिका में दिल्ली-केंद्र बिजली विवाद पर शीर्ष अदालत की 2018 और 2023 की संविधान पीठ के फैसलों का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि उपराज्यपाल के पास राष्ट्रीय राजधानी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कोई अधिकार नहीं है।
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