देश की खबरें | एसकेएम ने एमएसपी पर सरकार की समिति को खारिज किया
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नयी दिल्ली, 19 जुलाई संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने मंगलवार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकार की समिति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि निरस्त किए जा चुके कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले ‘‘तथाकथित किसान नेता’’ इसके सदस्य हैं।
एसकेएम ने घोषणा की कि वह समिति में शामिल नहीं होगा।
एसकेएम ने एक आधिकारिक बयान जारी कर आरोप लगाया कि समिति में सरकार ने अपने पांच ‘‘ निष्ठावान’’लोगों को शामिल किया है] जिन्होंने खुले तौर पर तीन ‘‘किसान विरोधी’’कानूनों का समर्थन किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनमें से सभी या तो सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हैं या उनकी नीतियों का समर्थन करते हैं।
एसकेएम के पांच नेताओं दर्शन पाल, हन्नान मुल्ला, जोगिंदर सिंह उगराहां, यदुवीर सिंह और योगेंद्र यादव ने बयान जारी कर कहा, ‘‘इन पांच लोगों ने खुले तौर पर तीनों कृषि विरोधी कानूनों का समर्थन किया था और इन्होंने किसान आंदोलन के खिलाफ ‘जहर उगला’ था।’’
एसकेएम ने कहा, ‘‘ तीन जुलाई की बैठक में हमने फैसला किया था कि हम किसी भी समिति के लिए अपने प्रतिनिधियों के नाम तभी देंगे, जब केंद्र की समिति के क्षेत्राधिकार और संदर्भ की शर्तें हमें स्पष्ट कर दी जाएंगी।’’
मोर्चा ने कहा, ‘‘समिति के एजेंडे में एमएसपी पर कानून बनाने का उल्लेख नहीं है। कुछ बातें एजेंडे में शामिल की गई हैं, जिसपर पहले ही सरकारी समिति गठित की जा चुकी है। कृषि क्षेत्र में सुधार और विपणन के नाम पर इन मुद्दों को शामिल किया गया है, जिसके जरिये सरकार तीनों कानूनों को वापस लाने की कोशिश कर सकती है।’’
एसकेएम नेताओं ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले यह सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी की कानूनी गांरटी हासिल करने के लिये संघर्ष जारी रहेगा।
सरकार ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेते हुए इस तरह की एक समिति के गठन का वादा किया था, जिसके आठ महीने बाद सोमवार को एमएसपी पर एक समिति का गठन किया गया। पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल समिति के अध्यक्ष होंगे। सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के तीन सदस्यों को समिति में शामिल करने का प्रावधान किया है।
एसकेएम के वरिष्ठ सदस्य दर्शन पाल ने आरोप लगाया कि केंद्र की समिति ‘फर्जी’ दिखती है क्योंकि वह किसानों के कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करने की बात नहीं करती।
किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि उन्हें इस समिति में कोई विश्वास नहीं है, क्योंकि इसके नियम और संदर्भ स्पष्ट नहीं हैं। दर्शन पाल ने पीटीआई- से कहा, ‘‘समिति में पंजाब का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। केंद्र द्वारा गठित यह समिति किसानों के कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करने की बात नहीं करती है।’’
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