देश की खबरें | डीएएनआईसीएस के छह अधिकारी लक्षद्वीप में प्रभार संभाले या कार्रवाई का सामना करें : मंत्रालय
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नयी दिल्ली, 22 मई केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के साथ कार्य कर रहे छह डीएएनआईसीएस अधिकारियों को लक्षद्वीप प्रशासन में ‘‘ तत्काल’’ अपनी सेवा देने के लिए उपस्थित होने में असफल रहने पर ‘‘बिना कोई और संदर्भ दिए’’ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
मंत्रालय का नवीनतम आदेश 20 मई को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधीकरण (कैट) की अध्यक्ष मंजुला दास की अध्यक्षता वाली पीठ के फैसले के बाद आया। कैट ने मंत्रालय द्वारा लक्षद्वीप स्थानांतरित करने के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर छह डीएएनआईसीएस अधिकारियों की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि इसमें ‘‘कोई दम’’ नहीं है।
संदीप कुमार मिश्रा, श्रवण बागरिया, शैलेंद्र सिंह परिहार, सिंगारे रामचंद्र महादेव, नितिन कुमार जिंदल और राकेश कुमार को तत्काल केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन में रिपोर्ट करने को कहा गया है। इन अधिकारियों को पिछले साल नवंबर में स्थानांतरण का आदेश दिया गया था जिसके बाद उन्होंने कैट का रुख किया था।
छह अधिकारियों को इस साल फरवरी में स्थानांतरण को लेकर स्मरण पत्र भेजा गया लेकिन उन्होंने कैट के समक्ष मामला लंबित होने के मद्देनजर इसे नजरअंदाज कर दिया।
हालांकि, कैट के 20 मई को आए 23 पन्नों के फैसले के बाद मंत्रालय ने ‘‘कार्यमुक्ति के लिए तैयार होने’’ का आदेश इन अधिकारियों को जारी किया और ‘‘तत्काल केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप’’में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।
मंत्रालय ने अधिकारियों से कहा कि वे नया कार्यभार संभालने की रिपोर्ट दें।साथ ही ऐसा नहीं करने पर बिना कोई अन्य संदर्भ दिए नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी।
कैट में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने पीठ का ध्यान डीएएनआईसीएस की स्थानांतरण नीति के प्रावधानों की ओर आकृष्ट कराया।
नियम कहता है कि ‘‘ नीति में कुछ भी होने के बावजूद गृहमंत्रालय को पूरा अधिकार है कि जरूरत होने पर किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण कभी भी प्रशासनिक आधार पर या जनहित में कर सकता है।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस मामले का निस्तारण (स्थानांतरण पर रोक हटाना) करना जरूरी है क्योंकि वृहद जनहित में इन अधिकारियों को वहां अपनी जिम्मेदारी को ग्रहण करना आवश्यक है।’’
कैट की प्रधान पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह कानून का तय कथन है कि सरकारी कर्मचारी स्थानांतरण के स्थान पर पदभार ग्रहण नहीं कर स्थानांतरण आदेश की अवहेलना नहीं कर सकता और इसके बाद अदालत अपनी शिकायतों को लेकर जाए।’’
पीठ ने कहा,‘‘यह उसका कर्तव्य है कि पहले वह अपने स्थानांतरण के स्थान पर जाए और कार्यभार संभाले और उसके बाद बताए कि उसकी निजी समस्या क्या है,जो इस मामले में नहीं किया गया।’’
प्रधान पीठ ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को किसी स्थान पर स्थानातंरण का कानूनी अधिकार नहीं है क्योंकि कर्मचारियों का स्थानांतरण स्थानातंरित होने वाले पद या श्रेणी में महज घटना नहीं बल्कि सेवा शर्त है। ‘‘यह लोक हित और प्रशासनिक कुशलता के लिए भी जरूरी है।’’
कैट ने शीर्ष अदालत के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि स्थानांतरण के स्थान पर कार्यभार नहीं संभालने और कानूनी लड़ाई में पड़ने की परिपाटी को उच्चतम न्यायालय ने भी गंभीर माना है।
कैट ने आवेदन में उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि स्थानांतरण आदेश में कारण नहीं बताया गया है। पीठ ने कहा, ‘‘हमारी राय है कि यह जरूरी नहीं है कि स्थानांतरण आदेश में ही उसके कारण का भी उल्लेख हो।’’
उल्लेखनीय है कि दिल्ली, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह प्रशासनिक सेवा (डीएएनआईसीएस) दिल्ली, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दमन-दीव और दादरा-नागर हवेली में प्रशासन के लिए लोक प्रशासन को अधिकारी उपलब्ध कराती है।
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