कांचीपुरम (तमिलनाडु), 30 अप्रैल पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के ऋग्वेद के विद्वान श्री सत्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती शंकराचार्य को बुधवार को यहां एक भव्य धार्मिक समारोह में प्राचीन कांची कामकोटि पीठ के कनिष्ठ धर्माचार्य के रूप में नियुक्त किया गया।
कांची मठ में परंपरा के अनुसार संन्यास लेने से पहले गणेश शर्मा द्रविड़ के नाम से जाने जाने वाले 25 वर्षीय आचार्य को मठ ने वर्तमान संत श्री विजयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य के उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी। यह ऐतिहासिक आयोजन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर हुआ जिसमें देश भर से संत शामिल हुए।
संन्यास दीक्षा महोत्सव के दौरान श्री विजयेंद्र सरस्वती ने डुड्डू सत्य वेंकट सूर्य सुब्रमण्यम गणेश शर्मा द्रविड़ को ‘सत्य चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य’ नाम दिया। इसके बाद उनका कांची कामकोटी पीठ के 71वें शंकराचार्य के रूप में अभिषेक किया गया।
श्री सत्य चंद्रशेखरेन्द्र शंकराचार्य ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मंदिरों में भी सेवा की है और ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद समेत कई धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया है।
पीठ की प्रतिष्ठित संन्यास परंपरा का पालन करते हुए, उनके गुरु और वर्तमान पीठाधिपति विजयेंद्र सरस्वती ने नए आचार्य को पवित्र दंड सौंपा। यह विशेष आयोजन तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
श्री सत्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती शंकराचार्य के पिता डुड्डू धन्वंतरि, मां अलीवेलु मंगादेवी और बहन भी दीक्षा समारोह में मौजूद रहीं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के प्रमुख नयनार नागेंद्रन ने कहा कि वह महान आध्यात्मिक गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित कांची कामकोटि पीठ के 71वें आचार्य के रूप में श्री सत्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती के अभिषेक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर बहुत प्रसन्न हैं।
नागेंद्रन ने कहा, "मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं कि वह इस परंपरा को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाएं। हमारे देश की आध्यात्मिक गरिमा आज भी संतों और मनीषियों की कृपा से बनी हुई है।"
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