जर्मनी में सोशल लाइफ पर स्क्रीन का कब्जा

दोस्तों की महफिलें सिमट रही हैं, जबकि ऑनलाइन दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

दोस्तों की महफिलें सिमट रही हैं, जबकि ऑनलाइन दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है. एआई अब लोगों का खाली समय भी चुरा रहा है.जर्मनी में फुर्सत के लम्हे बिताने का तरीका बदलता नजर आ रहा है. एक नए सर्वे के मुताबिक, जर्मन अब दोस्तों के साथ कम समय बिता रहे हैं और व्यक्तिगत तथा डिजिटल गतिविधियों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं.

दोस्तों के साथ मुलाकातें अब भी सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा तो हैं, लेकिन बदलती जीवनशैली के साथ इनकी अहमियत भी घटती जा रही है.

फुर्सत के पल कैसे बिता रहे हैं जर्मन?

हैम्बर्ग फाउंडेशन फॉर फ्यूचर स्टडीज के सर्वे के अनुसार, 3,000 प्रतिभागियों में से केवल 19 फीसदी लोगों ने कहा कि वे नियमित रूप से दोस्तों के साथ बाहर जाते हैं. 40 साल पहले किए गए फर्स्ट 'लीजर मॉनिटर' सर्वे में यह आंकड़ा 37 फीसदी था.

फाउंडेशन के विज्ञान निदेशक उलरिष राइनहार्ट के अनुसार, अब लोग सामाजिक संबंधों के लिए पहले की तुलना में डिजिटल और व्यक्तिगत विकल्पों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं.

इंटरनेट और स्मार्टफोन जर्मन लोगों की फुर्सत के सबसे बड़े साथी बनते जा रहे हैं. संगीत सुनने से लेकर सोशल मीडियाऔर वीडियो गेम तक, डिजिटल गतिविधियों में तेज उछाल देखा गया है. आंकड़े कुछ ऐसी तस्वीर उकेरते हैं.

82 फीसदी लोग सप्ताह में कम से कम एक बार डिजिटल माध्यम से संगीत सुनते हैं, जबकि 2016 में यह आंकड़ा 52 फीसदी था.

71 फीसदी लोग हर हफ्ते सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, पहले ये आंकड़ा 48 फीसदी था.

33 फीसदी लोग हफ्ते में एक या दो बार वीडियो गेम खेलते हैं, जबकि पहले यह संख्या सिर्फ 9 फीसदी थी.

डिजिटल गतिविधियों के इस बढ़ते प्रभाव के बीच एआई का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है. सर्वे कहता है, 42 फीसदी लोग सप्ताह में कम से कम एक बार AI का इस्तेमाल करते हैं, जबकि युवा पीढ़ी में यह आंकड़ा 62 फीसदी तक पहुंच चुका है.

राइनहार्ट के मुताबिक, युवा पीढ़ी AI की ओर केवल सवालों के जवाब पाने के लिए नहीं बढ़ रही है, कई लोग इसे सलाहकार, मार्गदर्शक और कुछ हद तक दोस्त के तौर पर भी देख रहे हैं.

डिजिटल जाल के बीच उम्मीद की अलग किरणें

हैरानी की बात यह है कि जहां लोग अधिक समय ऑनलाइन बिता रहे हैं, वहीं शारीरिक गतिविधियों में भी भागीदारी बढ़ी है. अब 53 फीसदी लोग सप्ताह में कम से कम एक बार व्यायाम करते हैं, जबकि 1986 में यह आंकड़ा केवल 18 फीसदी था.

भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अब सुकून के पल तलाश रहे हैं. फुर्सत में सिर्फ आराम करने का चलन भी तेजी से बढ़ा है. अब 62 फीसदी लोग अपना खाली समय आराम करने या कुछ न करते हुए बिताना पसंद करते हैं. 2016 के मुकाबले इस आंकड़े में 15 प्रतिशत अंकों का इजाफा हुआ है.

जहां कई सामाजिक आदतें बदल रही हैं, वहीं क्लबों और संगठनों से जुड़ने का चलन, जस का तस बना हुआ है. करीब 18 फीसदी लोग हफ्ते में एक बार खेलकूद, गायन या सामाजिक क्लबों की गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं. दिलचस्प बात यह है कि स्वयंसेवी कार्यों में हिस्सा लेने वाले जर्मनों की संख्या 40 साल में 6 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो गई है.

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