जरुरी जानकारी | सैट ने सेबी से केयर्न यूके होल्डिंग्स लाभांश मामले की जांच करने को कहा

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नयी दिल्ली, 11 जुलाई प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) ने केयर्न इंडिया लि. की तरफ से केयर्न यूके होल्डिंग्स लि. को लाभांश भुगतान नहीं करने के मामले में सेबी के आदेश को खारिज कर दिया है। सैट ने बाजार नियामक से छह महीने के भीतर मामले की जांच कर तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने का निर्देश दिया है।

केयर्न इंडिया का 2017 में वेदांता लि. में विलय हुआ था।

केयर्न यूके होल्डिंग्स लि. की सेबी के खिलाफ याचिका पर अपीलीय न्यायाधिकरण ने पांच जुलाई को अपने आदेश में यह बात कही।

सैट ने कहा, ‘‘सेबी का आदेश बरकरार नहीं रखा जा सकता और उसे खारिज किया जाता है। अपील की अनुमति दी जाती है।’’

न्यायाधिकरण ने कहा, ‘‘.... प्रथम दृष्ट्या अपीलकर्ता की शिकायत में दम लग रहा है। अत: हम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को सेबी कानून के तहत मामले की जांच शुरू करने का निर्देश देते हैं। सेबी छह महीने के भीतर मामले की जांच करे, कंपनी कानून, एलओडीआर नियमन (सूचीबद्धता बाध्यता खुलासा आवश्यकता) नियमन आदि के प्रावधानों का उल्लंघन आदि का पता लगाये और इसे तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाये।’’

ब्रिटेन की कंपनी ने केयर्न इंडिया द्वारा 340 करोड़ रुपये लाभांश का भुगतान नहीं करने को लेकर अप्रैल, 2017 में नियामक से शिकायत की थी।

केयर्न यूके होल्डिंग्स ने मामले में कंपनी कानून के तहत केयर्न इंडिया के प्रत्येक निदेशक के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया था।

हालांकि, सेबी ने शिकायत को खारिज कर दिया। उसने कहा कि कंपनी ने भुगतान नहीं किए गए लाभांश का भुगतान आयकर विभाग को किया। इसलिए नियामक के लिये मामले में आगे कोई कार्रवाई करना उपयुक्त नहीं है।

उसके बाद केयर्न यूके होल्डिंग्स ने सेबी के आदेश को सैट के समक्ष चुनौती दी। अपीलीय न्यायाधिकरण ने नियामक से 2019 में मामले पर दोबारा से गौर करने को कहा।

मामले पर पुनर्विचार के बाद सेबी ने इस आधार पर शिकायत खारिज कर दी कि केयर्न इंडिया ने कंपनी कानून और एलओडीआर नियमन का उल्लंघन नहीं किया।

सैट ने अपने आदेश में कहा कि केयर्न इंडिया के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2013-14, 2014-15 और 2015-16 में लाभांश की घोषणा की। लेकिन लाभांश अपीलकर्ता को नहीं मिला।

सैट के अनुसार, यह पता चलता है कि आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2006-07 के लिये आकलन कार्यवाही शुरू की और 22 जनवरी, 2014 को एक अस्थायी कुर्की आदेश पारित किया। इस आदेश को समय-समय पर बढ़ाया गया और 31 मार्च, 2016 को यह समाप्त हो गया।

कुर्की आदेश के कारण केयर्न इंडिया अपीलकर्ता को लाभांश जारी नहीं कर सकी। लेकिन 31 मार्च, 2016 को कुर्की आदेश की समाप्ति के बाद केयर्न इंडिया पर लाभांश जारी नहीं करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था।

सैट ने अपने आदेश में कहा, ‘‘पहली नजर में मामला कंपनी कानून के उल्लंघन का है....हमारा मानना है कि सेबी ने संबंधित दस्तावेज पर विचार नहीं किया।’’

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