देश की खबरें | जीआईपीई के कुलाधिपति पद से हटाए जाने पर सान्याल ने तोड़ी चुप्पी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री की आर्थिक मामलों की सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य संजीव सान्याल ने शनिवार को पुणे स्थित गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पालिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (जीआईपीई) के कुलाधिपति पद से हटाए जाने पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हाल ही में ‘नैक’ (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित संस्थान को मिले खराब ग्रेड पूर्ववर्ती नेतृत्व के प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
पुणे, पांच अप्रैल प्रधानमंत्री की आर्थिक मामलों की सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य संजीव सान्याल ने शनिवार को पुणे स्थित गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पालिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (जीआईपीई) के कुलाधिपति पद से हटाए जाने पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हाल ही में ‘नैक’ (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित संस्थान को मिले खराब ग्रेड पूर्ववर्ती नेतृत्व के प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
जीआईपीई की मूल संस्था सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी (एसआईएस) ने बृहस्पतिवार को सान्याल को पद से हटा दिया था। एसआईएस ने इस फैसले के पीछे शैक्षणिक स्तर में गिरावट, स्थिति में सुधार के लिए ‘ठोस कदम’ उठाने में उनके विफलत रहने और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से ‘बी ग्रेड’ मिलने का हवाला दिया था।
सान्याल ने एसआईएस के अध्यक्ष दामोदर साहू को संबोधित करके लिखे पत्र की प्रति सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने जीआईपीई में हाल की घटनाओं पर टिप्पणी करने से परहेज किया है, लेकिन अब वे ‘कुछ बातें सार्वजनिक करना चाहते हैं’।
उन्होंने कहा, ‘‘एसआईएस अध्यक्ष साहू ने मुझे जीआईपीई के कुलाधिपति पद से हटाने के लिए दो दलीलें दी हैं। पहला, मैं नैक द्वारा दिये गए खराब ‘बी’ ग्रेड रेटिंग के लिए जिम्मेदार हूं। ध्यान दें कि मैंने अक्टूबर 2024 में ही पदभार संभाला है और नवंबर में पहली बार वहां का दौरा किया। जबकि नैक की रेटिंग 2018-23 के बीच के आंकड़ों पर आधारित थी।’’
सान्याल ने कहा, ‘‘ नैक प्रमाणन में वर्तमान ‘बी ग्रेड’ शायद ही कुलाधिपति या कुलपति के प्रयासों को दर्शाता है, जिनके पास नैक सत्यापन से पहले कोई समय नहीं था। निश्चित रूप से, यह ‘बी ग्रेड’ वर्तमान के बजाय संस्थान के पहले के नेतृत्व के प्रदर्शन को दर्शाता है।’’
साहू के दावा किया था कि सान्याल ने 24 मार्च को भेजे गए पत्र का समय पर जवाब नहीं दिया। इसपर उन्होंने कहा कि वह एलएसई, किंग्स कॉलेज आदि में व्याख्यान देने के लिए ब्रिटेन में थे।
सान्याल ने कहा, ‘‘मैं 30 मार्च की देर रात लौटा और 31 मार्च को भारत के सबसे वरिष्ठ शिक्षाविदों में से एक से इस पर गौर करने का अनुरोध किया। वह एक दिन बाद सहमत हो गईं, लेकिन एसआईएस ने मेरे जवाब लिखने से पहले ही पत्र (हटाए जाने के बारे में सूचित करने के लिए) भेज दिया।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)