ताजा खबरें | परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा: सरकार
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. देश के परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किए जाने का दावा करते हुए सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि बदलती प्रौद्योगिकी के साथ जोखिम भी बढ़ता है लेकिन समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर फैसले किए जाते हैं।
नयी दिल्ली, पांच दिसंबर देश के परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किए जाने का दावा करते हुए सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि बदलती प्रौद्योगिकी के साथ जोखिम भी बढ़ता है लेकिन समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर फैसले किए जाते हैं।
प्रश्नकाल के दौरान, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने बताया कि सुरक्षा संबंधी समस्या मानकों का पालन किया जाता है और हादसे की स्थिति में पहली जिम्मेदारी संचालक की और फिर आपूर्तिकर्ता की होती है।
किसी भी तरह का परमाणु हादसा होने की स्थिति में जवाबदेही की तैयारी के संबंध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मनोज कुमार झा के पूरक प्रश्न के उत्तर में डॉ सिंह ने बताया कि बदलती प्रौद्योगिकी के साथ जोखिम भी बढ़ता है लेकिन समय समय पर सरकार स्थिति की समीक्षा कर फैसले लेती है।
सिंह ने बताया कि बीते तीन साल में अंतरिक्ष के क्षेत्र में निजी भागीदारों की संख्या बढ़ी है और परमाणु ऊर्जा विभाग विश्व मंच में अपनी पहचान बना रहा है तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में आज 300 से अधिक स्टार्ट अप हैं।
उन्होंने बताया कि बीते बरसों में परमाणु के क्षेत्र में भारत ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं और पिछले 50 साल से सक्रिय तारापुर संयंत्र बेहतर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कैगा संयंत्र ने 952 दिन लगातार काम किया है। पहला स्वदेशी भारी जल परमाणु संयंत्र काकरापाड़ ने भी उल्लेखनीय काम किया है। यह अपने आप में उपलब्धियां हैं। हम आज केवल सीमित संसाधनों में ही नहीं ठहरे हुए हैं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में हमारा उल्लेखनीय काम जारी है।’’
कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा ‘‘परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड 40 साल पहले बनाया गया था। क्या सरकार एक स्वतंत्र परमाणु ऊर्जा नियामक स्थापित करने के बारे में विचार कर रही है ?’’
इस पर डॉ सिंह ने कहा कि देश के हित में सरकार सभी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा पर पहले और उत्पादन पर इसके बाद ध्यान दिया जाता है। उन्होंने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर तंज करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार न केवल प्रतिष्ठान की योजना बनाती है बल्कि उन्हें पूरा भी करती है और उनका क्रियान्वयन भी करती है।
उन्होंने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की निगरानी एजेंसी है।
परमाणु संयंत्र के कारण विकिरण की समस्या के बारे में मंत्री ने कहा कि यह आशंका निर्मूल है और विकिरण में कमी देखी गई है।
समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने कहा कि देश के एकमात्र फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कलपक्कम की सीमाएं असुरक्षित हैं और दुश्मन अगर हमला करे तो क्या होगा ?
यादव ने जानना चाहा कि क्या इस संयंत्र की सुरक्षा के लिए कोई पोत या पनडुब्बी है क्योंकि यह बंगाल की खाड़ी के किनारे है और इसके एक ओर हिंद महासागर तथा एक ओर लाल सागर है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री ने कहा कि संयंत्र की निगरानी की समुचित व्यवस्था है। उन्होंने कहा, ‘‘नित नए सिर उठाते जोखिमों के मद्देनजर सरकार परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्कता बरतते हुए कदम उठाती है। कलपक्कम संयंत्र की सुरक्षा की भी चाक चौबंद व्यवस्था की गई है।’’
शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत ने पूछा कि परमाणु संयंत्र देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के तारापुर संयंत्र के लिए कई किसानों ने जमीन दी, मछुआरों ने भी समझौता कर अपना काम बंद कर दिया लेकिन आज भी इस क्षेत्र के परमाणु संयंत्र से प्रभावित दो हजार से अधिक परिवारों का पुनर्वास क्यों नहीं हो पाया?
उन्होंने कहा, ‘‘प्रभावितों को न नौकरी मिली न पक्के मकान मिले। प्रतिनिधिमंडल मंत्री और प्रधानमंत्री से भी मिल चुका है।’’
जितेंद्र सिंह ने इसके जवाब में बताया, ‘‘सरकार ऐसे मुद्दों पर संयंत्र की योजना बनाने के साथ ही विचार शुरु कर देती है। नियम भी तैयार किए जाते हैं। सीएसआर से भी ऐसे विस्थापितों के लिए व्यवस्था की जाती है। नौकरी में भी ऐसे परिवारों को प्राथमिकता और छूट दी जाती है। समय के साथ-साथ समस्या बढ़ती है लेकिन फिर भी यह सिलसिला जारी है।’’
द्रमुक की कनिमोई एनवीएन शोमू के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि परमाणु कचरे के समुचित तरीके से निपटन की व्यवस्था संयंत्रों में होती है और इससे पहले, इस कचरे का पुन:चक्रण किया जाता है।
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