देश की खबरें | वित्तीय तंत्र में बाधाओं के कारण रूस-भारत के संबंध तनाव में हैं : रूसी राजदूत अलीपोव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. रूस ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन संघर्ष पर अमेरिका की अगुवाई में पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण आर्थिक एवं साजोसामान तंत्र में बाधाओं के कारण भारत के साथ उसके संबंध ‘‘तनाव’’ में हैं।

नयी दिल्ली, छह फरवरी रूस ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन संघर्ष पर अमेरिका की अगुवाई में पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण आर्थिक एवं साजोसामान तंत्र में बाधाओं के कारण भारत के साथ उसके संबंध ‘‘तनाव’’ में हैं।

भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने अमेरिका पर अपने फायदे के लिए भारत और चीन के बीच ‘‘विरोधाभासों’’ का ‘‘सक्रियता’’ से दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि मॉस्को और नयी दिल्ली ने दशकों पुराने संबंधों पर आधारित परस्पर विश्वास हासिल किया है, जिससे दोनों पक्षों को मौजूदा भूराजनीतिक अशांति से निपटने में मदद मिलेगी।

अलीपोव ने एक सम्मेलन में कहा कि यूक्रेन संघर्ष पर अमेरिका की अगुवाई में पश्चिमी देशों के ‘‘अहंकारी’’ और ‘‘लड़ाकू’’ रवैये से बनावटी भू-राजनीतिक बदलाव के कारण भारत-रूस के संबंध ‘‘तनाव’ में हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच रुपये-रूबल व्यापार के लिए एक तंत्र स्थापित किया गया है लेकिन भारतीय बैंक इसके इस्तेमाल को लेकर ‘‘अत्यधिक सतर्कता’’ बरत रहे हैं, जबकि इस प्रणाली को लेकर अमेरिका की ओर से कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

अलीपोव ने कहा कि रूस के कच्चे तेल पर पश्चिमी देशों की मूल्य सीमा के बावजूद मॉस्को भारत को पेट्रोलियम उत्पाद समेत अन्य निर्यात के स्तर को बनाए रखेगा।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों ने लेनदेन और साजोसामान संबंधी तंत्र को बाधित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं तनाव के बारे में बात करता हूं तो मेरा खासतौर से मतलब आर्थिक संबंधों से है। प्रतिबंधों ने लेनदेन और साजोसामान संबंधी तंत्र को बाधित किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी मुद्दों पर दोनों पक्ष बहुत करीबी संवाद कर रहे हैं। वोस्त्रो खाते खोले गए हैं। रुपये-रूबल व्यापार के लिए तंत्र स्थापित किया गया है। अब बैंकों को इसका इस्तेमाल करने की बात है।’’

उन्होंने कहा कि रूस पाकिस्तान के साथ अपनी आर्थिक भागीदारी बढ़ाना चाहता है क्योंकि एक ‘‘कमजोर’’ पाकिस्तान, भारत समेत पूरे क्षेत्र के लिए ठीक नहीं है।

बाद में एक ट्वीट में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब था कि एक ‘‘अस्थिर’’ पाकिस्तान क्षेत्र में किसी के भी हित में नहीं है।

वह ‘इंडिया राइट्स नेटवर्क’ और ‘सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स’ द्वारा आयोजित ‘भारत-रूस सामरिक साझेदारी में अगले कदम: पुरानी मित्रता नए क्षितिज’ पर एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

एक सवाल के जवाब में अलीपोव ने कहा कि रूस, भारत-चीन के संबंधों को सामान्य देखना चाहता है और इससे न केवल एशिया की सुरक्षा बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा को काफी फायदा पहुंचेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि इसमें बहुत गंभीर बाधाएं हैं, दोनों देशों के बीच बहुत गंभीर सीमा समस्या है। हमारी चीन के साथ सीमा समस्या है, एक वक्त चीन के साथ सशस्त्र संघर्ष हुआ, बातचीत करने में हमें करीब 40 साल लग गए लेकिन आखिरकार एक समाधान तलाशने का यही एकमात्र रास्ता है।’’

अलीपोव ने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहने जा रहा हूं कि भारत या चीन को क्या करना चाहिए...यह भारत और चीन के बीच पूरी तरह से द्विपक्षीय मामला है और हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करते हैं। लेकिन जितना जल्दी दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य हो, उतना ही पूरी दुनिया के लिए यह बेहतर होगा। अगर हमारे प्रयासों की आवश्यकता पड़ी तो हम यह करेंगे।’’

भारत-रूस संबंधों के ‘तनाव’ में होने की अपनी टिप्पणियों को स्पष्ट करते हुए रूसी राजूदत ने दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक भागीदारी पर पश्चिमी प्रतिबंधों के असर की ओर इशारा किया।

अलीपोव ने कहा कि रूस भारत के साथ सहयोग में विविधता लाना चाहता है और दोनों देशों के बीच संबंध किसी के खिलाफ नहीं है।

भारत के साथ रूस के समग्र संबंधों पर उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के विपरीत हमें एक-दूसरे को तथा दुनिया को यह बताने की जरूरत नहीं है कि कुछ वजहों से अतीत में हमारे बीच करीबी साझेदारी संभव नहीं हो पायी।’’

अलीपोव ने दावा किया कि अगर अमेरिका का चीन के साथ तालमेल बैठ जाता है या नयी दिल्ली बीजिंग के साथ संबंध सुधारने में कामयाब हो जाता है तो भारत के प्रति अमेरिका का रवैया बदल सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए वह अपने फायदे के लिए भारत और चीन के बीच विरोधाभासों का सक्रियता से दुरुपयोग कर रहा है।’’

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बनाम निरंकुशता का एक नया प्रतिमान उभर रहा है ताकि अमेरिका अपनी जैसी विचारधारा वाले साझेदारों के बीच निर्णायक स्थिति बनाए रखे।

रूसी राजदूत ने कहा कि भारत और रूस ने पिछले कुछ दशक में ‘‘आपसी विश्वास, समझ और सहयोग’’ का मजबूत अनुभव अर्जित किया है जो दोनों देशों को मौजूदा भूराजनीतिक शांति से निपटने का भरोसा देता है।

अलीपोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए उनके देश के समर्थन की पुष्टि की।

उन्होंने कहा, ‘‘अहम अंतरराष्ट्रीय साझेदार के रूप में रूस के लिए भारत का महत्व स्पष्ट रूप से बढ़ने जा रहा है। हमारी अनूठी तथा विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए काफी कुछ किया गया। वैश्विक परिवर्तन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक समृद्ध एजेंडा है।’’

उल्लेखनीय है कि मॉस्को के यूक्रेन पर आक्रमण के बावजूद भारत और रूस के बीच रिश्ते मजबूत बने रहे। कई पश्चिमी देशों में बढ़ती बेचैनी के बावजूद भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात पिछले कुछ महीनों में काफी बढ़ गया है।

भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की निंदा नहीं की है और यह कहता रहा है कि संकट को कूटनीति और बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

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