जरुरी जानकारी | जीएम सरसों के मूल्यांकन की प्रक्रिया में हुआ नियमों का उल्लंघनः विरोधी संगठन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों का विरोध करने वाले गैर सरकारी संगठनों के एक समूह ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी कर जीएम सरसों के मूल्यांकन और उसे मंजूरी दिये जाने की प्रक्रिया में नियमों के "उल्लंघन" का आरोप लगाया गया है।

नयी दिल्ली, छह जनवरी आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों का विरोध करने वाले गैर सरकारी संगठनों के एक समूह ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी कर जीएम सरसों के मूल्यांकन और उसे मंजूरी दिये जाने की प्रक्रिया में नियमों के "उल्लंघन" का आरोप लगाया गया है।

'द कोअलिशन ऑफ जीएम-फ्री इंडिया' की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएम-सरसों के मंजूरी-पूर्व मूल्यांकन के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी शामिल नहीं किया गया था।

इस रिपोर्ट पर पर्यावरण मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

गत अक्टूबर में पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किस्म 'धारा मस्टर्ड हाइब्रिड' (डीएमएच-11) को बीज उत्पादन और व्यावसायिक स्तर पर जारी करने से पहले इसके पर्यावणीय परीक्षण की अनुमति दे दी थी। अभी तक सिर्फ कपास ही ऐसी जीएम फसल है जिसकी भारत में खेती की अनुमति है।

पर्यावरणीय परीक्षण शुरू होने से पहले इस गठबंधन ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर परीक्षणों को रोकने के निर्देश देने की मांग की है।

जीएम-विरोधी कार्यकर्ताओं और किसानों के अनुसार, जीएम सरसों खरपतवार-नाशक के प्रति सहनशील फसल है लिहाजा इस पर जहरीले रसायनों का छिड़काव करने से इसका सेवन करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा। उनका यह भी तर्क है कि यह पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है और भारतीय कृषि की स्थितियों के अनुकूल नहीं है।

गठबंधन की यह रिपोर्ट 10 जनवरी को मामले पर उच्चतम न्यायालय में होने वाली एक महत्वपूर्ण सुनवाई से पहले आई है। उसने रिपोर्ट में आरटीआई, मीडिया रिपोर्टों और सरकारी दिशानिर्देशों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि "यह अनुमोदन भारत के सीमित जैव सुरक्षा नियमों की कुल विफलता को प्रदर्शित करता है और विनियामक व्यवस्था में गंभीर कमियों को भी दर्शाता है।’’

इसमें आरटीआई से मिले जवाब का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी (स्वतंत्र) स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने जीएम सरसों के मूल्यांकन में कभी भी भाग नहीं लिया।

गठबंधन ने कहा कि जीएम सरसों का खरपतवार-नाशी के अनुकूल फसल के रूप में परीक्षण नहीं हुआ क्योंकि इन फसलों के लिए कोई नियामक दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल नहीं हैं।

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