जरुरी जानकारी | कृषि, ग्रामीण कामगारों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में मामूली नरम

नयी दिल्ली, 20 फरवरी कृषि और ग्रामीण कामगारों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में मासिक आधार पर मामूली घटकर क्रमश: 7.52 प्रतिशत और 7.37 प्रतिशत रही। मुख्य रूप से कुछ खाद्य वस्तुओं के दाम कम होने से महंगाई में कमी आई है।

बीते वर्ष दिसंबर में कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एएल) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-ग्रामीण श्रमिक (सीपीआई-आरएल) क्रमश: 7.71 प्रतिशत और 7.46 प्रतिशत पर था।

श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति पिछले महीने 9.67 प्रतिशत और 9.43 प्रतिशत रही। जबकि दिसंबर, 2023 में यह 9.95 प्रतिशत और 9.80 प्रतिशत थी। वहीं एक साल पहले यह 6.61 प्रतिशत और 6.47 प्रतिशत थी।

जनवरी, 2023 में कृषि कामगारों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 6.85 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए 6.88 प्रतिशत था।

अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या कृषि कामगारों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक-एक अंक बढ़कर क्रमश: 1,258 और 1,268 अंक रहा। यह दिसंबर, 2023 में क्रमश: 1,257 और 1,267 अंक था।

कृषि कामगारों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए सूचकांक में वृद्धि का मुख्य कारण विविध समूहों का रहा। इनका योगदान क्रमश: 1.57 और 1.55 अंक रहा। ईंधन और प्रकाश समूह का 1.16 प्रतिशत और 1.10 प्रतिशत रहा। मुख्य रूप से दवा, चिकित्सक की फीस, सिनेमा टिकट, लकड़ी आदि के दाम बढ़ने से सूचकांक बढ़ा है।

कृषि कामगारों के मामले में तमिलनाडु 1,470 अंक के साथ सूचकांक सूची में सबसे ऊपर रहा। वहीं हिमाचल प्रदेश 970 अंक के साथ निचले स्थान पर रहा।

ग्रामीण श्रमिकों के मामले में आंध्र प्रदेश 1,454 अंक के साथ सूची में शीर्ष पर रहा जबकि हिमाचल प्रदेश 1,020 अंक के साथ निचले स्थान पर रहा।

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