विदेश की खबरें | धर्म का इस्तेमाल कभी भी युद्ध की ‘‘बुराई’’ को सही ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए: पोप फ्रांसिस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. फ्रांसिस ने पूर्व सोवियत गणराज्य कजाकिस्तान में एक अंतरधार्मिक सम्मेलन की शुरुआत की। उन्होंने कजाकिस्तान के एक कवि के हवाला देते कहा ‘‘जो बुराई की अनुमति देता है और उसका विरोध नहीं करता है, उसे सच्चा आस्तिक नहीं माना जा सकता।’’

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

फ्रांसिस ने पूर्व सोवियत गणराज्य कजाकिस्तान में एक अंतरधार्मिक सम्मेलन की शुरुआत की। उन्होंने कजाकिस्तान के एक कवि के हवाला देते कहा ‘‘जो बुराई की अनुमति देता है और उसका विरोध नहीं करता है, उसे सच्चा आस्तिक नहीं माना जा सकता।’’

रूस के ऑर्थोडॉक्स चर्च के प्रमुख धर्मगुरु पैट्रियार्क किरिल ने आध्यात्मिक और वैचारिक आधार पर रूस के आक्रमण का समर्थन किया है तथा इसे पश्चिम के साथ ‘‘आध्यात्मिक’’ लड़ाई बताया है।

फ्रांसिस ने कजाख सम्मेलन में अपनी टिप्पणी में रूस या यूक्रेन का उल्लेख नहीं किया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक नेताओं को खुद शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें लोगों को शांति का रास्ते अपनाने का ही आह्वान करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘अतीत की गलतियों और त्रुटियों को ध्यान में रखते हुए, आइए हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को एकजुट करें कि ‘‘सत्ता की भूख के लिए’’ कभी भी ईश्वर की आड़ नहीं ली जानी चाहिए।

पोप फ्रांसिस ने कहा कि विवादों का समाधान बातचीत के जरिये किया जाना चाहिए न कि हथियारों से। उन्होंने कहा कि हिंसा को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता है।

एपी

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