देश की खबरें | गोकशी के आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गोकशी के चार आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इन आरोपियों में एक सरकारी अध्यापक, एक मदरसा अध्यापक और दो अन्य लोग शामिल हैं जिनके कब्जे से गाय का मांस और 16 पशु बरामद किए गए ।
प्रयागराज, छह जुलाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गोकशी के चार आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इन आरोपियों में एक सरकारी अध्यापक, एक मदरसा अध्यापक और दो अन्य लोग शामिल हैं जिनके कब्जे से गाय का मांस और 16 पशु बरामद किए गए ।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्राथमिकी पर गौर करने से प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के खिलाफ संज्ञेय अपराध बनता है, और इस तरह से उनके खिलाफ इस मामले को रद्द करने का कोई मामला नहीं बनता।
इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए, 420, 429, 188, 269, 270, 273, गो वध निषेध कानून की धारा 3/5/8 और पशु क्रूरता रोधी कानून की धारा 11 और पर्यावरण संरक्षण कानून की धारा 7/8 के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें 29 मई, 2020 को आरोप पत्र दाखिल किया गया और इसका मुकदमा मऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित है।
इन चार आरोपियों में से एक आरोपी सरकारी अध्यापक है, जबकि दूसरा आरोपी भी मदरसा दारुल उलूम गौसिया कस्बा सलेमपुर में सहायक अध्यापक है। वहीं तीसरा आरोपी दवा की दुकान चलाता है और चौथा आरोपी हाफिज कुरान है।
याचिकाकर्ता के वकील ने सोमवार को अदालत में दलील दी कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में यह खुलासा नहीं किया गया है कि जो नमूना विश्लेषण के लिए भेजा गया था, वह गाय का था। इसलिए गोकशी निरोधक कानून के तहत कोई मामला नहीं बनता।
वहीं राज्य सरकार के वकील ने कहा कि वह एफआईआर एक विस्तृत रिपोर्ट है जिसमें यह उल्लेख है कि 16 जीवित पशुओं के अलावा दो क्विंटल गाय का मांस कथित तौर पर 10 लोगों के पास से बरामद किया गया जिनमें ये याचिकाकर्ता भी शामिल थे।
अदालत ने परवेज अहमद और तीन अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कहा, “मौजूदा मामले में याचिकाकर्ताओं ने एफएसएल की रिपोर्ट को आधार बनाकर अपना बचाव करने की कोशिश की, लेकिन प्राथमिकी में ना केवल गाय के मांस की बरामदगी का उल्लेख है, बल्कि 16 जीवित पशुओं की बरामदगी का भी उल्लेख है। इसलिए याचिकाकर्ताओं द्वारा बचाव के लिए पेश दलील पर निचली अदालत विचार करेगी।”
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