देश की खबरें | ‘पुस्तकालय महोत्सव’ में दुर्लभ मानचित्र, सचित्र पांडुलिपियां आकर्षण का केंद्र
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को नयी दिल्ली में ‘पुस्तकालय महोत्सव’ का उद्घाटन किया। यह महोत्सव, संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुस्तकालयों के विकास और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना तथा पढ़ने की संस्कृति को विकसित करना है।
नयी दिल्ली, पांच अगस्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को नयी दिल्ली में ‘पुस्तकालय महोत्सव’ का उद्घाटन किया। यह महोत्सव, संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुस्तकालयों के विकास और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना तथा पढ़ने की संस्कृति को विकसित करना है।
‘एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई’ और ‘पास्ट प्रेजेंट हेरिटेज मैनेजमेंट’ की प्रदर्शनी ‘‘मैप्ड: ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिक सर्वे’’ में 1802 में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा किए गए वृहद त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण से पहले और बाद में बनाए गए भारत के मानचित्रों को प्रदर्शित किया गया है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘पुस्तकालयों का विकास तथा समाज और संस्कृति का विकास आपस में जुड़े होते हैं। यह सभ्यताओं की प्रगति का पैमाना भी होता है। इतिहास ऐसे संदर्भों से भरा पड़ा है, जहां आक्रमणकारियों ने पुस्तकालयों को नष्ट करना आवश्यक समझा था।’’
मुर्मू ने कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि पुस्तकालयों को किसी देश या समाज की सामूहिक चेतना और बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना गया है। आधुनिक युग में ऐसी घटनाएं नहीं होती हैं, लेकिन दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों के गायब होने की घटनाएं होती हैं। दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों को वापस लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकालय सभ्यताओं के बीच सेतु का काम करते हैं। प्राचीन और मध्यकाल में कई देशों के लोग भारत से पुस्तकें ले जाते थे, उनका अनुवाद करते थे और ज्ञान प्राप्त करते थे। ऐसे प्रयासों के केंद्र में यह विचार है कि किताबें और पुस्तकालय मानवता की साझी विरासत होती है।
दस मानचित्रों की एक श्रृंखला को प्रदर्शित किया गया है। सबसे पुराना मानचित्र 1700 ईस्वी का है। ‘‘मैप्ड’’ भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा दुर्लभ मानचित्रों और कार्टोग्राफिक सामग्री पर बड़ी प्रदर्शनी का एक हिस्सा है, जिसमें ‘ऐतिहासिक मानचित्र श्रृंखला’, ‘वन मानचित्र श्रृंखला’, ‘राजस्व मानचित्र श्रृंखला’, और ‘मुद्रित और प्रकाशित मानचित्र श्रृंखला’ शामिल हैं।
संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव मुग्धा सिन्हा ने कहा ‘‘इस महोत्सव का उद्देश्य पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण पर एक संवाद शुरू करना और भारत में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।’’
दुर्लभ मानचित्रों पर प्रदर्शनी के अलावा, आगंतुक कोलकाता के ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड’ से दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह, प्राचीन विश्वकोश, सांस्कृतिक अभिलेखागार, ब्रिटिश शासन के दौरान प्रतिबंधित साहित्य समेत सचित्र पांडुलिपियों का संग्रह भी देख सकते हैं। महोत्सव का समापन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की अध्यक्षता में एक समारोह के साथ होगा।
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