देश की खबरें | दुष्कर्म पीड़ित किशोरी ने नवजात बच्ची को खाली प्लॉट में छोड़ा, आरोपी युवक पर मामला दर्ज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान में अपने रिश्ते के भाई के हाथों कथित तौर पर दुष्कर्म की शिकार एक किशोरी ने स्कूल के शौचालय में बच्ची को जन्म देने के बाद उसे एक खाली प्लॉट में अकेला छोड़ दिया। अपनी रिश्ते की बहन का 11 महीनों तक यौन उत्पीड़न करने के आरोपी 21 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।

कोटा, 27 नवंबर राजस्थान में अपने रिश्ते के भाई के हाथों कथित तौर पर दुष्कर्म की शिकार एक किशोरी ने स्कूल के शौचालय में बच्ची को जन्म देने के बाद उसे एक खाली प्लॉट में अकेला छोड़ दिया। अपनी रिश्ते की बहन का 11 महीनों तक यौन उत्पीड़न करने के आरोपी 21 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।

नवजात बच्ची को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि दुष्कर्म पीड़ित लड़की का इलाज चल रहा है और उसकी हालत में सुधार हो रहा है।

बूंदी के पुलिस अधीक्षक जय यादव ने कहा कि पुलिस ने शनिवार की सुबह नवजात बच्ची के मिलने के चार-पांच घंटे के अंदर नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का पता लगा लिया।

बूंदी सदर पुलिस थाने के क्षेत्र निरीक्षक अरविंद भारद्वाज ने संवाददाताओं से कहा कि 15 वर्षीय पीड़िता की ओर से शनिवार को दिये गये बयान के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और यौन अपराध से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत 21 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि आरोपी युवक अभी फरार है।

उन्होंने कहा कि यह पता चला है कि आरोपी और नाबालिग लड़की रिश्ते में भाई-बहन हैं और आरोपी पिछले 10-11 महीनों से उससे दुष्कर्म करने के साथ उसका यौन उत्पीड़न कर रहा था।

नाबालिग लड़की अपनी दादी के घर अक्सर जाया करती थी और आरोपी भी उसी गांव में रहता था। वह दादी के साथ कुछ दिनों तक रहती और इस दौरान मौका पाकर आरोपी उससे दुष्कर्म करता जिसके कारण वह गर्भवती हो गई।

नाबालिग ने बूंदी शहर में स्थित एक निजी स्कूल के शौचालय में शनिवार सुबह एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन बाद में नवजात बच्ची को एक खाली प्लॉट में छोड़ दिया।

यादव ने कहा कि इस मामले में दुष्कर्म पीड़िता के माता-पिता की भूमिका भी जांच के घेरे में है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले ही भारतीय दंड संहिता की धारा 315 (बच्चे को जीवित जन्म लेने से रोकने की मंशा से किया गया कृत्य) के तहत भी मामला दर्ज कर लिया गया है।

कोटा स्थित जे के लोन अस्पताल के आशुतोष शर्मा ने कहा, ‘‘नवजात को यहां शनिवार को लाया गया तो वह गंभीर हाइपोथर्मिया और सेप्सिस से पीड़ित थी और उसके शरीर पर खरोंच के निशान थे। फिलहाल नवजात को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रख गया है और उसके लिए अगले 48 घंटे अहम हैं।’’

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