देश की खबरें | राज्यसभा उच्च सदन हैं, लोकसभा बड़ा भाई: धनखड़

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नयी दिल्ली, 20 अप्रैल उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्यसभा ‘वरिष्ठों का सदन’ या उच्च सदन है, लेकिन लोकसभा ‘बड़ा भाई’ है क्योंकि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, देश के खजाने की कुंजी किसके पास होगी, ये सब इस सदन में तय होता है।

धनखड़ ने यहां राज्यसभा दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में यह बात कही।

राज्यसभा सभापति ने कहा कि …हमारे संविधान में जो बात है, उससे भी हमें ज्ञान लेना चाहिए और वह ज्ञान यह है कि भारत की संसद के तीन हिस्से हैं सर्वोपरि राष्ट्रपति, फिर है लोकसभा और उसके बाद राज्यसभा।

उन्होंने लोकसभा महासचिव की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘हम एक हैं। कई बार यह बात आती है कि यह लोकसभा है, यह राज्यसभा है। हम वरिष्ठों के सदन (हाउस ऑफ एल्डर्स) हैं या उच्च सदन हैं। लेकिन ये (लोकसभा) बड़े भाई हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देश का प्रधानमंत्री कौन होता है? ये तय करते हैं, खजाने की कुंजी किसको जाती है, ये तय करते हैं… तो इस भाईचारे को और बढ़ाएं।’’

धनखड़ ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तारीफ की। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों सदनों की भूमिका संविधान निर्माताओं ने तय की है।

राज्यसभा तीन अप्रैल, 1952 को अस्तित्व में आई थी और इसकी पहली बैठक 13 मई, 1952 को हुई।

राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने बृहस्पतिवार के कार्यक्रम में कहा कि संसद एक ऐसी संस्था है जिसे बदलते समय के साथ बदलना होता है।

धनखड़ ने राज्यसभा के कर्मचारियों को सुझाव दिया कि समूहों में देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करें जिसमें सचिवालय मदद की पेशकश करेगा।

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