देश की खबरें | राजनाथ ने रक्षा उद्योग से किफायती सैन्य उत्पाद बनाने का आह्वान किया
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नयी दिल्ली, 27 सितंबर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भारतीय रक्षा विनिर्माताओं का आह्वान किया कि वे न केवल भारत के लिए, बल्कि दुनिया के लिए भी अत्याधुनिक और किफायती सैन्य उत्पादों का उत्पादन करें।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने 2025 तक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में 1.75 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है और सैन्य उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है।
रक्षा मंत्री सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के पांचवें वार्षिक सत्र को संबोधित कर रहे थे।
सिंह ने जोर देकर कहा कि सरकार पूरी तरह त्रुटिरहित सुरक्षा तंत्र के महत्व को समझती है तथा देश को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के सभी आयामों को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा, "केवल एक सुरक्षित और मजबूत राष्ट्र ही सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। कोई भी देश कितना भी अमीर या ज्ञानवान क्यों न हो, अगर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो उसकी समृद्धि को खतरा है।"
सिंह ने कहा, "हम भारत को दुनिया के सबसे मजबूत देशों में से एक बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"
रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी निजी क्षेत्र को ‘गेम चेंजर’ मानते थे और वर्तमान सरकार उस विजन को बड़े उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है।
सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय अलग-अलग समयसीमा के बाद 309 रक्षा वस्तुओं का आयात न करने से संबंधित तीन सूची पहले ही जारी कर चुका है।
उन्होंने रक्षा उत्पादन के लिए रणनीतिक साझेदारी मॉडल पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य देश में लड़ाकू जेट, सैन्य हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बियों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
रक्षा मंत्री ने कहा, "हमें बस चलते रहना है, बिना थके चलते रहना है।"
सिंह ने भारतीय रक्षा उद्योग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'न्यू इंडिया' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अत्याधुनिक किफायती उत्पादों और प्रौद्योगिकियों की पहचान करने तथा निर्माण करने का आह्वान किया, जो न केवल अपनी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जरूरतों को पूरा करें।
भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश को पिछले वित्त वर्ष में कुल 83.57 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ जो एक "रिकॉर्ड" है।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया भारत में निवेश करने को लेकर दिलचस्पी दिखा रही है क्योंकि देश एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है।
सिंह ने कहा, "यह दर्शाता है कि अब बहुत तेज गति से आगे बढ़ने का समय है।"
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