देश की खबरें | पंजाब: कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात

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चंडीगढ़, तीन मई कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को यहां पंजाब के राज्यपाल बी एल पुरोहित से मुलाकात कर कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता जताई और दिल्ली के साथ 'ज्ञान-साझाकरण समझौते' को समाप्त करने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को दो ज्ञापन सौंपे।

वडिंग और बाजवा ने यहां पत्रकारों से कहा, राज्यपाल ने उनसे कहा है कि वह सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करते, लेकिन संविधान उल्लंघन की स्थिति में वह आवश्यक कदम उठाएंगे।

कानून और व्यवस्था पर सौंपे गए ज्ञापन में पिछले सप्ताह पटियाला में कथित खालिस्तान विरोधी मार्च को लेकर दो समूहों के बीच झड़प का उल्लेख किया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि अग्रिम खुफिया जानकारी होने के बावजूद, सरकार समय पर कार्रवाई करने में विफल रही।

ज्ञापन में कहा गया है कि यह प्रशासन की विफलता है। उसमें कहा गया है कि पटियाला की सड़कों पर पूरी तरह से अराजकता फैला दी गई।

ज्ञापन में कहा गया है, ''कुछ पुलिस अधिकारियों के तबादले बहुत कम हैं और बहुत देर से उठाया गया कदम है। इसके अलावा यह सरकार का चेहरा बचाने के लिए सिर्फ ढकोसला था।''

मुख्य विपक्षी दल ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के साथ व्यक्तिगत हिसाब चुकता करने के लिए पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है।

इसमें कहा गया है, ''प्रसिद्ध कवि डॉ कुमार विश्वास और प्रमुख कांग्रेस नेता अलका लांबा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना इस बात का उदाहरण है कि किस तरह से पुलिस का दुरुपयोग व्यक्तिगत हिसाब चुकता करने के लिए किया जा रहा है।''

कांग्रेस ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि हत्या, लूट और डकैती आज के समय में आम बात हो गई है। अपराधी खुला घूम रहे हैं और उन्हें कानून का कोई डर नहीं है।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है, ''ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि राज्य में क्या हो रहा है। इसके अलावा, वे कहीं और व्यस्त हैं, जिनका राज्य से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।''

दिल्ली और राज्य के बीच 26 अप्रैल को हस्ताक्षरित ‘ज्ञान-साझाकरण समझौते’ पर, ज्ञापन में कहा गया है कि यह समझौता 'पूरी तरह से अवैध और शुरू से ही अमान्य' है।

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