ताजा खबरें | डाकघर विधेयक को राज्यसभा से मिली मंजूरी, सरकार ने डाक सेवाओं के निजीकरण के आरोपों को किया खारिज

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा ने सोमवार को डाकघरों से संबंधित कानून को समेकित और संशोधित करने के उद्देश्य से लाए गए एक अहम विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

नयी दिल्ली, चार दिसंबर राज्यसभा ने सोमवार को डाकघरों से संबंधित कानून को समेकित और संशोधित करने के उद्देश्य से लाए गए एक अहम विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

डाकघर विधेयक, 2023 पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डाक सेवाओं के निजीकरण संबंधी विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह सवाल ही नहीं उठता। डाक सेवाओं के निजीकरण का ना तो विधेयक में कोई प्रावधान है ना ही सरकार की ऐसी कोई मंशा है।’’

उन्होंने बताया कि इस कानून के जरिए कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है और सुरक्षा संबंधी उपाय भी किए गए हैं।

वैष्णव ने विधेयक में ‘इंटरसेप्शन’ के प्रावधान के बारे में स्पष्ट किया कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से रखा गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे प्रक्रियाएं पारदर्शी होंगी। सदस्यों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस विधेयक का मकसद डाक सेवाओं को विस्तार देना है। आज डाक सेवा बैंकिंग सेवाओं की तरह काम कर रही है। करीब 26 करोड़ खाते हैं और 17 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। साधारण परिवारों के लिए पैसे बचाने का यह एक जरिया भी है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत तीन करोड़ खाते हैं और इनमें करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये जमा हैं।’’

उन्होंने कहा कि डाकघरों को व्यावहारिक रूप से एक बैंक में तब्दील किया गया है। उन्होंने कहा कि डाकघरों के विस्तार को देखें तो 2004 से 2014 के बीच 670 डाकघर बंद किए गए वहीं 2014 से 2023 के बीच करीब 5,000 नये डाकघर खोले गये तथा करीब 5746 डाकघर खुलने की प्रक्रिया में हैं।

डाक विभाग में खेल कोटे से नौकरियों का खत्म किए जाने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह तो संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने ही 2011 में किया था जबकि आज की सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है।

उन्होंने कुछ सदस्यों के उस दावे को भी खारिज किया कि देश में डाक सेवा की शुरुआत अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र से पर्सिया तक की डाक सेवा 2000 साल पहले स्थापित थी।

विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की सोच भी अंग्रेजों के जमाने सी है।’’

डाक विभाग में नौकरियां नहीं दिए जाने संबंधी आरोपों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस विभाग में 1.25 लाख लोगों को रोजगार दिया गया है।

दूरसंचार मंत्री ने कहा कि 1,60,000 डाकघरों को कोर बैंकिंग और डिजिटल बैंकिंग से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि डाकघर में बने 434 पासपोर्ट सेवा केंद्रों में अभी तक करीब सवा करोड़ पासपोर्ट आवेदनों पर समुचित कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि 13,500 डाकघर आधार सेवा केंद्र खोले जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि डाक विभाग किफायती कीमतों में आधुनिक सेवा मुहैया कराता है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

विधेयक के उद्देश्य एवं कारण में कहा गया है कि इसका उद्देश्य भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 को निरस्त करना और भारत में डाकघर से संबंधित कानून को समेकित और संशोधित करना और उससे जुड़े या उसके प्रासंगिक मामलों का प्रावधान करना है।

इसमें कहा गया है कि भारतीय डाकघर कानून, 1898 भारत में डाकघर के कामकाज को संचालित करने की दृष्टि से 1898 में अधिनियमित किया गया था। यह कानून मुख्यतया डाकघर के जरिए प्रदान की जाने वाली मेल सेवाओं से संबंधित है।

इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि देश में डाक व्यवस्था के कई रूप थे किंतु करीब डेढ़ सौ साल पहले ब्रिटिश शासन ने उसे एकरूपता दी और भारतीय डाक को ‘एक नया रूप और रंग मिला’।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने यह काम जनता के हित के लिए नहीं बल्कि अपने शासन एवं व्यापारिक हितों के लिए किया था।

गोहिल ने कहा, ‘‘आज हम फक्र से कह सकते हैं कि दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे बेहतरीन डाक सेवा कहीं हैं, तो हमारे यहां है।’’ उन्होंने कहा कि ‘कुछ फर्जी डिग्री वाले एवं व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी वाले’ यह सवाल करते हैं कि देश में 70 साल में क्या हुआ तो उनको यह बताया जाना चाहिए कि इस दौरान दुनिया की सबसे बेहतरीन डाक सेवा दी गयी।

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सार्वजनिक उपक्रमों को मारकर निजी क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने सवाल किया कि टाई पहने कूरियर वाला मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद में तो डाक दे जाएगा किंतु क्या वह कच्छ के छोटे से गांव में कूरियर पहुंचाएगा?

कांग्रेस सदस्य गोहिल ने सरकार को नसीहत दी कि उसे इस मंशा से निकलना होगा कि लाभ कमाने वाले सार्वजनिक उद्यम यह काम करेंगे और सार्वजनिक उद्यम को बंद कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी गांव गांव में लोगों को भारतीय डाक सेवा पर भरोसा है।

विधेयक के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में, डाकघर के माध्यम से उपलब्ध सेवाओं में काफी विविधता आई है और डाकघर नेटवर्क विभिन्न प्रकार की नागरिक केंद्रित सेवाओं की डिलीवरी के लिए एक प्रमुख माध्यम बन गया है, जिसके कारण मूल अधिनियम को निरस्त करना और उसके स्थान पर नया कानून लागू करना आवश्यक हो गया है।

इसमें जिक्र किया गया है कि डाकघर ऐसी सेवाएं प्रदान करेगा जो केंद्र सरकार नियमों द्वारा निर्धारित करती है। इसके साथ ही डाक सेवा महानिदेशक उन सेवाओं को प्रदान करने के लिए आवश्यक गतिविधियों को लेकर नियम बनाएंगे और ऐसी सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित करेंगे। डाकघर को डाक टिकट जारी करने का विशेषाधिकार होगा।

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