देश की खबरें | जामा मस्जिद में मीरवाइज के ससुर की जनाजे की नमाज पर रोक लगाने के लिए पुलिस की निंदा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक के ससुर की जनाजे की नमाज़ पुराने शहर की जामिया मस्जिद में पढ़ाने की इजाजत नहीं देने के लिए जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने बृहस्पतिवार को पुलिस की आलोचना की।

श्रीनगर, 27 फरवरी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक के ससुर की जनाजे की नमाज़ पुराने शहर की जामिया मस्जिद में पढ़ाने की इजाजत नहीं देने के लिए जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने बृहस्पतिवार को पुलिस की आलोचना की।

अधिकारियों ने मस्जिद के बाहर बैरिकेड लगाकर उसे सील कर दिया। सुरक्षाकर्मियों को भी तैनात कर दिया।

पुलिस ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

फारूक के ससुर गुलाम सिब्तैन मसूदी (80) का लंबी बीमारी के बाद बुधवार को यहां इंतकाल हो गया।

नेकां ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट एक बयान में कहा, “श्रीनगर की जामा मस्जिद में डॉ. सिब्तैन मसूदी की नमाज-ए-जनाज़ा पढ़ाने की इजाजत नहीं देने का फैसला बेहद खेदजनक और गलत है। इस तरह की कार्रवाई न केवल प्रतिगामी है बल्कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति होने के दावों के खोखलेपन को भी दर्शाती है।”

नेकां हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी है, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश होने की वजह से जम्मू-कश्मीर पुलिस उपराज्यपाल के तहत आती है।

पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि पुराने शहर में मसूदी की जनाजे की नमाज पर रोक लगाना अधिकारियों की ओर से "क्रूरता" है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “ यह अकल्पनीय और क्रूर है कि अधिकारियों ने आज जामा मस्जिद में मीरवाइज साहब के ससुर डॉ गुलाम सिब्तैन मसूदी साहब की नमाज-ए-जनाज़ा पर रोक लगा दी। लोगों ने सोचा था कि निर्वाचित सरकार के बाद कुछ राहत मिलेगी लेकिन वे अपनी चुप्पी की वजह से (इसमें) सहभागी हैं, जिससे भारत सरकार की दमनकारी नीति को और मजबूत हुयी है।”

पेशे से डॉक्टर मसूदी 1974 में आगे की पढ़ाई के लिए कश्मीर से अमेरिका चले गए थे और 28 साल बाद वापस लौटे। उन्हें पुलवामा जिले के ख्रीव में उनके पैतृक कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।

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