नयी दिल्ली, एक जून राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें बढ़ रहे टिड्डियों के हमले को नियंत्रित करने के लिए केंद्र की आकस्मिक योजना को लागू करने का अनुरोध किया गया था।
एनजीटी ने कहा कि याचिका में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे साबित हो कि संबंधित एजेंसियां इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैं।
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एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने कहा, ‘‘ आवेदक ने स्वीकार किया है कि आकस्मिक योजना है लेकिन यह साबित करने के लिए कुछ नहीं है कि संबंधित एजेंसियां इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। हमें इस धारणा पर आदेश पारित करने के लिए कोई आधार नहीं मिलता है कि अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।’’
हालांकि, अधिकरण ने गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ एंड इनवायरमेंटल लिटिगेशन फाउंडेशन को संबंधित विभाग में अपनी शिकायतों को लेकर जाने की आजादी दे दी।
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यह याचिका एनजीओ ने वकील गौरव बंसल के जरिये दाखिल की थी। इसमें कहा गया कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के पास आकस्मिक योजना होने के बावजूद फरवरी से टिड्डियों के हमले जारी हैं और कुछ इलाकों में स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
याचिका में कहा गया, ‘‘सबसे बुरी तरह से प्रभावित इलाके के किसान हैं। इसलिए आवेदक एनजीओ अधिकरण से तुंरत हस्तक्षेप करने और वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय, कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और केंद्र सरकार को मामले में स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध करता है।’’
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