(प्रमोद कुमार)
पटना, आठ अक्टूबर समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की 11 अक्टूबर को 120वीं जयंती से पहले बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने 1970 के दशक में आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले आंदोलनों में भाग लेने और इस दौरान जेल की सजा काटने वाले उनके समर्थकों की लंबित पेंशन जारी कर दी है।
अधिकारियों ने कहा कि कुछ लाभार्थियों को 2009 से यह पेंशन नहीं मिल रही है।
जेपी के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण की जयंती पर इस बार बिहार में राजनीतिक गतिविधियों का सिलसिला तेज होने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जेपी के जन्मस्थान, सारण जिले के सिताब दियारा का दौरा करने वाले हैं, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को दीमापुर में ऑल नगालैंड बिहारी सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के एक नेता ने कहा कि दीमापुर में, नीतीश कुमार जेपी के समय से नगालैंड के राजनीतिक व आर्थिक क्षेत्र में बिहारियों के योगदान का उल्लेख करेंगे।
राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा द्वारा पिछले महीने जारी आदेश के अनुसार जेपी सेनानी पेंशन योजना के उन छह लाभार्थियों के भुगतान के लिए 14.90 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, जिनकी पेंशन विभिन्न कारणों से रोक दी गई थी। इससे पूर्व 8 अगस्त को 16 पेंशनभोगियों को लंबित पेंशन वितरित करने के लिए 61.2 लाख रुपये जारी करने की स्वीकृति दी गई थी। गृह विभाग ने 10 पेंशनभोगियों की लंबित पेंशन जारी करने की मंजूरी दे दी है।
यह पूछे जाने पर कि उनकी पेंशन इतने लंबे समय से क्यों लंबित है, इसपर अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) चैतन्य प्रसाद ने कहा, “मुझे इसकी जांच करनी होगी।”
नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2009 में योजना की शुरुआत के बाद से जुलाई 2021 तक 428 जेपी सेनानी पेंशनभोगियों या उनके जीवनसाथी की मृत्यु हो चुकी है।
गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि पेंशन जारी रखने के लिए मौजूदा 180 पेंशनभोगियों की पत्नियों के सत्यापन दस्तावेज जेपी सेनानी पेंशन बोर्ड तक नहीं पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा, “अनिवार्य अवधि के भीतर सत्यापन दस्तावेज जमा करने में विफल रहने पर उनके जीवित होने पर संदेह पैदा होता है। योजना के तहत पेंशन जारी रखने के लिए संबंधित अधिकारी नियमित रूप से मौजूदा लाभार्थियों या उनके जीवनसाथी का सत्यापन करते हैं। देरी का एक कारण यह भी है।”
गृह विभाग ने पिछले महीने जेपी सेनानी पेंशन योजना के 2,495 लाभार्थियों या उनके जीवनसाथी को भुगतान करने के लिए 2.55 करोड़ रुपये जारी किए थे। लेकिन उनकी पेंशन लंबित नहीं थी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2009 में जयप्रकाश नारायण के नाम पर पेंशन योजना शुरू की थी। यह पेंशन 1970 के दशक में आपातकाल के दौरान जेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन में जेल की सजा काटने वाले लोगों या उनके जीवनसाथियों के लिये शुरू की गई थी।
राज्य सरकार ने पिछले साल जेपी सेनानियों की पेंशन राशि बढ़ा दी थी।
एक से छह महीने जेल में बिताने वाले जेपी सेनानी की पेंशन राशि 5000 रुपये से 7500 रुपये और छह महीने से अधिक समय तक ऐसा करने वालों की पेंशन राशि 10,000 रुपये से 15,000 रुपये तक है।
इस योजना के प्रमुख लाभार्थी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी हैं। हालांकि नीतीश कुमार भी पेंशन के मानदंडों को पूरा करते हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए कभी आवेदन नहीं किया। 15,000 रुपये प्रति माह पाने वाले मौजूदा पेंशनभोगियों की संख्या 939 है, वहीं 7500 रुपये मासिक पाने वाले पेंशनभोगियों की तादाद 1742 है।
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