देश की खबरें | संसदीय समिति ने अपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले विधेयकों पर तीन रिपोर्ट स्वीकार की
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नयी दिल्ली, पांच नवंबर गृह मामलों संबंधी संसद की स्थायी समिति ने सोमवार को मौजूदा आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले विधेयकों पर तीन रिपोर्ट स्वीकार की, हालांकि कुछ विपक्षी सदस्यों ने लिखित में अपनी असहमति दर्ज कराई है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बृज लाल की अध्यक्षता में समिति की सोमवार को बैठक हुई। इससे लगभग 10 दिन पहले समिति के सदस्यों ने मसौदा रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेने के लिये भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम से संबंधित तीन विधेयकों पर रिपोर्ट को लेकर कुछ विपक्षी सदस्यों ने पहले ही लिखित में अपनी असहमति दर्ज कराई है।
सूत्रों ने कहा कि कुछ और विपक्षी सदस्यों द्वारा नियमानुसार अगले दो दिनों में असहमति पत्र सौंपने की संभावना है।
गत 27 अक्टूबर को गृह मामलों संबंधी संसद की स्थायी समिति तीन मसौदा रिपोर्ट को स्वीकार नहीं कर सकी थी, क्योंकि समिति में शामिल कुछ विपक्षी सदस्यों ने इनका अध्ययन करने के लिए अधिक समय देने का दबाव डाला था।
औपनिवेशिक युग के आपराधिक कानूनों में पूरी तरह से बदलाव की पैरवी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को बदलने के लिए तीन विधेयक पेश किए थे।
सदन ने 11 अगस्त को पेश किए जाने के बाद इन विधेयकों को पड़ताल के लिए संसदीय समिति के पास भेज दिया था और तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा था।
हक
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