ताजा खबरें | संसद ने ‘अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक को दी मंजूरी
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद ने ‘अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2023 को बृहस्पतिवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिसमें खनन के क्षेत्र में नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
नयी दिल्ली, तीन अगस्त संसद ने ‘अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2023 को बृहस्पतिवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिसमें खनन के क्षेत्र में नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
राज्यसभा ने इस विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। विधेयक में अपतटीय क्षेत्र में 50 वर्ष के लिए उत्पादन पट्टा देने का प्रावधान है।
उच्च सदन में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि अपतटीय खनन के मामले में पर्यावरण संबंधी किसी नियम का उल्लंघन नहीं होगा तथा संबद्ध राज्यों के साथ समुचित विचार विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अपतटीय खनन के साथ मात्स्यिकी आदि विभिन्न कार्य साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक में अपतटीय खनन से होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति के प्रावधान किए गए हैं।
जोशी ने कहा कि देश में इस समय ‘‘अमृतकाल’’ चल रहा है और इस विधेयक के कानून बनने के बाद अपतटीय क्षेत्र में खनन के माध्यम से बहुमूल्य रत्नों को बाहर निकाला जाएगा।
जोशी ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के शासनकाल में खनन क्षेत्र में निविदाएं प्रदान करने के मामले में हुई अनियमितताओं का उल्लेख किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निजी क्षेत्र द्वारा किए गए खनन में परमाणु खनिज मिलते हैं तो उसका दायित्व सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) को दिया जाएगा। उन्होंने कुछ सदस्यों द्वारा अपतटीय क्षेत्र में खनन की प्रक्रिया को काफी महंगा बताये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया भले ही अधिक निवेश वाली हो किंतु इसके पहले जरूरी है कि कोई नियम या कानून मौजूद हो और सरकार इसी उद्देश्य के साथ यह विधेयक लायी है।
विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि इससे खानों एवं खनन संबंधी कार्यों की नीलामी में पारदर्शिता आएगी।
उन्होंने कहा कि विधेयक में नियमों का उल्लंघन होने पर दंड की राशि 50 हजार रूपये से बढ़ाकर पांच से दस लाख रूपये करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि देश जब विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा हो तो यह आवश्यक हो जाता है कि हम खनन कार्यों को बढ़ाकर खनिजों के आयात पर लगने वाली विदेशी मुद्रा की बचत करें।
भारतीय जनता पार्टी के अनिल सुखदेवराव बोंडे ने कहा कि अपतटीय खनन के मामले में अध्ययन एवं विकास कार्यों को इस विधेयक के प्रावधानों से काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा देश की तटीय रेखा बहुत विशाल हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक में ‘‘कंपोजिट लाइसेंस’’ देने का प्रावधान किया गया है।
अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई ने कहा कि तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र में खनन कार्यों में लगे कुछ निजी क्षेत्र के लोग नियमों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने की जरूरत है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
विधेयक पर हुई चर्चा में भाजपा के के लक्ष्मण, वाईएसआर कांग्रेस के विजयसाई रेड्डी और बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने भी भाग लिया।
विधेयक के माध्यम से ‘अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002’ में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।
इसके उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि भारत, नौ तटीय राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों की लंबी तटरेखा और वृहद आर्थिक क्षेत्र एवं समुद्री स्थिति में होने के बावजूद अपनी विकास संबंधी जरूरतों के लिए अपतटीय खनिज संसाधनों का दोहन नहीं कर पा रहा है।
इसके अनुसार वर्तमान कानून में परिचालन अधिकारों को आवंटित करने के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी तंत्र के विधिक ढांचे की कमी और ब्लाकों के आवंटन पर लंबित मुकदमों के गतिरोध के कारण अपतटीय ब्लाकों के आवंटन के पिछले प्रयासों के वांछित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में यह विधेयक लाया गया है।
इसमें कहा गया कि इसके माध्यम से प्रतियोगी बोली द्वारा केवल नीलामी के माध्यम से निजी क्षेत्रों के लिए उत्पादन पट्टे को प्रदान करने का उपबंध किया गया है।
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