विदेश की खबरें | पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय ने इमरान की गिरफ्तारी को ‘गैरकानूनी’ घोषित किया, तत्काल रिहाई का आदेश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. (सज्जाद हुसैन और योषिता सिंह)
(सज्जाद हुसैन और योषिता सिंह)
इस्लमाबाद/संरा, 11 मई पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय ने बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी को ‘गैर कानूनी’ करार दिया और उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले शीर्ष अदालत के निर्देश पर खान को उसके समक्ष पेश किया गया।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान के सुरक्षाबलों से संयम बरतने की अपील की है जबकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने पूरे घटनाक्रम पर स्तब्धता जताई है।
उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल, न्यायमूर्ति मुहम्मद अली मजहर और न्यायमूर्ति अतहर मिनल्लाह की तीन सदस्यीय पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री खान को रिहा करने का फैसला उनको इस्लामाबाद उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ्तार करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
पीठ ने अल-कादिर ट्रस्ट मामले में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान की गिरफ्तारी के खिलाफ उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर में अर्धसैनिक रेंजर्स द्वारा जिस तरीके से हिरासत में लिया गया उसपर नाराजगी जताई।
इससे पहले, न्यायालय ने भ्रष्टाचार रोधी निगरानी संस्था राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) को इमरान खान को एक घंटे के भीतर शाम साढ़े चार बजे (स्थानीय समयानुसार) पेश करने का निर्देश दिया था।
खान को अदालत के समक्ष कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया। जैसे ही वह अदालत कक्ष में दाखिल हुए, उसके दरवाजे बंद कर दिए गए और उसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई शुरू की।
प्रधान न्यायाधीश बंदियाल ने खान से कहा, ‘‘आपको देख कर अच्छा लगा।’’ अदालत ने संक्षित सुनवाई में खान की गिरफ्तारी को ‘गैर कानूनी’ करार दिया और आदेश दिया कि उन्हें रिहा किया जाए।
शीर्ष अदालत ने खान को निर्देश दिया कि वह शुक्रवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अर्जी दे और आगे की कानूनी प्रक्रिया का अनुपालन करें।
न्यायाधीश ने कहा,‘‘उच्च न्यायालय जो भी फैसला दे आपको स्वीकार करना होगा।’’
न्यायमूर्ति बंदियाल ने यह भी कहा कि प्रत्येक नेता की जिम्मेदारी है कि वह कानून व्यवस्था सुनिश्चित करे।
सुनवाई के दौरान खान ने अदालत को बताया कि उनका ‘अदालत से तब अपहरण किया गया’ जब वह अपील दाखिल करने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी देने की तैयारी कर रहे थे। खान ने दावा किया कि उन्हें हिंसा का शिकार होना पड़ा, उनकी नृशंसता से पिटाई की गई और इस तरह का व्यवहार किया गया जो अपराधियों के साथ भी नहीं होता है।
जब प्रधान न्यायाधीश ने प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई हिंसा की निंदा करने को कहा तो खान ने पूरे प्रकरण से खुद को अलग करते हुए कहा कि वह हिरासत में थे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कैसे खूनी प्रदर्शनों के लिए जिम्मेदार हो सकता हूं?’’
खान ने कहा कि उन्होंने कभी हिंसा का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी से अपील करता हूं कि वे सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने से बचे।’’
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह केवल चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
खान के वकीलों ने अदालत के बाहर कहा कि उनके मुवक्किल ने भी प्रदर्शन रोकने की अपील की है।
इससे पहले, सुनवाई शुरू होने पर प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया कि किसी व्यक्ति को अदालत परिसर से कैसे गिरफ्तार किया जा सकता है। न्यायमूर्ति मिनल्लाह ने कहा कि निश्चित रूप से खान अदालत परिसर में प्रवेश कर गए थे। उन्होंने कहा, ‘‘न्याय के अधिकार से किसी को कैसे वंचित किया जा सकता है।’’
इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि एजेंसी द्वारा किसी को भी अदालत परिसर में और रजिस्ट्रार की अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि यह गिरफ्तारी भय और धमकी के बिना न्याय पाने के अधिकार से वंचित करने जैसा है जो प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
अदालत ने कहा कि व्यक्ति द्वारा अदालत परिसर में दाखिल होने का अभिप्राय है कि वह अदालत में आत्मसमर्पण कर रहा है, फिर कैसे व्यक्ति को आत्मसमर्पण करने के बाद गिरफ्तार किया जा सकता है? प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ जब व्यक्ति अदालत में आत्मसमर्पण कर रहा हो तो उसकी गिरफ्तारी का क्या अभिप्राय है?’’
खान के वकील हामिद खान ने अदालत को सूचित किया कि उनके मुवक्किल इस्लामाबाद उच्च न्यायालय अग्रिम जमानत लेने गए थे लेकिन अर्धसैनिक रेंजर्स ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ रेंजर्स ने इमरान खान के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें गिरफ्तार किया।’’
प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया, ‘‘अगर 90 लोग (रेंजर्स) परिसर में प्रवेश कर जाते हैं तो अदालत की क्या गरिमा रह जाती है? अदालत परिसर से किसी व्यक्ति को कैसे गिरफ्तार किया जा सकता है?’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने ‘अदालत की अवमानना’ की है। उन्होंने कहा, ‘गिरफ्तारी से पहले ब्यूरो को अदालत के रजिस्ट्रार से अनुमति लेनी चाहिए थी। अदालत के कर्मचारियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।’
खान को मंगलवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर से गिरफ्तार किया गया था और जवाबदेही अदालत ने उन्हें आठ दिनों के लिए अल-कादिर ट्रस्ट मामले में एनएबी की हिरासत में भेज दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया था और एक मई को एनएबी द्वारा जारी वारंट को रद्द करने और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उनकी गिरफ्तारी को वैध करार देने के फैसले के खिलाफ अपील की थी।
वहीं, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बृहस्पतिवार को देश में जारी राजनीतिक संकट और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुई हिंसा पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपील की कि इस पूरे संकट का राजनीतिक समधान किया जाए बजाय उत्पीड़न की कार्रवाई और गिरफ्तारी के।
वर्ष 2018 में राष्ट्रपति बनने से पहले खान की पीटीआई के सदस्य रहे अल्वी ने ट्विटर पर जारी बयान में कहा, ‘‘देश में मौजूदा स्थिति से चिंतित, हैरान और बहुत ही परेशान हूं।’’
उन्होंने स्वीकार किया कि विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन साथ ही कहा कि यह ‘‘कानून की सीमा में रहकर किया जाना चाहिए।’’
अल्वी ने कहा,‘‘जिस तरह से कुछ उपद्रवी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, खासतौर पर सरकारी और सैन्य इमारतों को वह निंदनीय है। हमें फिर से राजनीतिक समाधान के बारे में सोचना चाहिए बजाय दमन या गिरफ्तारी के। मैंने अपनी चिंताएं राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को पहुंचा दी है और उम्मीद है कि हालात सुधरेंगे।’’
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने वोल्कर तुर्क ने पाकिस्तान में प्रदर्शनकारियों से हिंसा से बचने की अपील की है। उन्होंने साथ ही पाकिस्तान के सुरक्षाबलों से संयंम बरतने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक विवाद का समाधान करने के लिए कानून का राज आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार के उच्चायुक्त तुर्क ने ट्वीट किया, ‘‘ इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध को हटाया जाना चाहिए। अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण सभा और कानून का राज राजनीतिक विवादों का समाधान करने के लिए अहम है। अनुचित बल प्रयोग का कोई स्थान नहीं है। प्रदर्शनकारियों को हिंसा से बचना चाहिए।’’
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी पाकिस्तान के हालात का संज्ञान लिया है। महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि गुतारेस ने पाकिस्तान के अधिकारियों से पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई के दौरान तय प्रक्रिया का पालन करने और कानून का राज कायम रखने की अपील की है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)