देश की खबरें | पाकिस्तान को काबुल में सत्ता परिवर्तन के बाद भी कूटनीतिक बढ़त नहीं मिली : श्याम सरन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान में हुए सत्ता परिवर्तन का भी लाभ उठाने में असफल रहा है, बल्कि उलटे भारत से वे जितना मानते हैं, उससे कहीं बड़ा खतरा अफगानिस्तान से पैदा हो गया है।
नयी दिल्ली, 11 फरवरी पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान में हुए सत्ता परिवर्तन का भी लाभ उठाने में असफल रहा है, बल्कि उलटे भारत से वे जितना मानते हैं, उससे कहीं बड़ा खतरा अफगानिस्तान से पैदा हो गया है।
सरन ने कहा कि चीन को भी अफगानिस्तान में तालिबान शासन का लाभ नहीं मिला, क्योंकि उसे पूर्वी तुर्किस्तान (चीन का पश्चिमी इलाका) की स्थिति से निपटने में काबुल का उतना सहयोग नहीं मिला, जितने की उसने उम्मीद की थी।
उन्होंने ‘इंडियन वीमेन प्रेस कोर’ (आईडब्ल्यूपीसी) में मीडिया से संवाद करते हुए कहा, ‘‘ अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन से पाकिस्तान को वैसा कूटनीतिक या रणनीतिक लाभ नहीं मिला, जिसकी पाकिस्तानियों ने उम्मीद की होगी। आज भारत से वे जितना खतरा मानते हैं, उससे कहीं बड़ा खतरा उन्हें अफगानिस्तान से पैदा हो गया है।’’
सरन ने याद किया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन की वापसी का समर्थन किया था उसका कहना था कि काबुल में गैर मित्रवत सरकार नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि न तो पाकिस्तान ने और न ही चीन ने तालिबान शासन को मान्यता दी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह रेखांकित करता है कि पूर्व के अनुमान से स्थिति कहीं अधिक जटिल है।’’ पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह चीन की अफगानिस्तान में उपस्थिति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
सरन ने रेखांकित किया कि भारत का पाकिस्तान के चश्मे से परे अफगानिस्तान के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है और यह नयी दिल्ली की विश्वसनीय मध्य एशियाई नीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा भारत के साथ शांति का आह्वान इस्लामाबाद द्वारा संबंधों को सुधारने की शुरुआत हो सकती थी;‘‘ लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत कदम पीछे खींच लिए। ’’
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के साथ संबंध को लेकर भारत द्वारा सतर्क रुख अपनाने के वाजिब कारण हैं।
सरन ने कहा कि ऐसा कई बार हुआ कि दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने के लिए कदम बढ़ाए, लेकिन पाकिस्तान में मौजूद ‘कुछ तत्वों’ ने उसे नाकाम कर दिया।
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