देश की खबरें | दिवाली पर ताश खेलने की परंपरा को भुनाने में जुटे 'ऑनलाइन गेम्स'

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोरोना वायरस महामारी की वजह से करीब एक साल से जहां परीक्षाएं, सम्मेलन समेत कई जरूरी गतिविधियां ऑनलाइन सिमट आई हैं। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक दूरी के नियम के पालन पर जोर दिया जा रहा है। इसे देखते हुए ऑनलाइन गेम्स वाले ऐप और वेबसाइट दिवाली पर कई लोगों द्वारा खेले जाने वाले ताश और पत्ती की परंपरा को शामिल करा इसे 'भुनाने' में जुट गई हैं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 11 नवंबर कोरोना वायरस महामारी की वजह से करीब एक साल से जहां परीक्षाएं, सम्मेलन समेत कई जरूरी गतिविधियां ऑनलाइन सिमट आई हैं। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक दूरी के नियम के पालन पर जोर दिया जा रहा है। इसे देखते हुए ऑनलाइन गेम्स वाले ऐप और वेबसाइट दिवाली पर कई लोगों द्वारा खेले जाने वाले ताश और पत्ती की परंपरा को शामिल करा इसे 'भुनाने' में जुट गई हैं।

कोविड-19 ने लोगों के पारंपरिक रूप से मिलने जुलने, पार्टी करने के अवसर को छीन लिया है। संक्रमण के खतरे के चलते इस बार दिवाली पर ताश-पत्ती के साथ दोस्तों-मित्रों और परिवार के साथ टेबल पर बैठकर सांकेतिक जुआ खेलना और दांव लगाना संभव नहीं होगा।

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हालांकि, ऐसे लोगों को बाजी गेम्स, स्टिकपूल और पॉकेट-52 जैसे ऐप और वेबसाइट ने ऑनलाइन खेलने का विकल्प दिया है जिसमें लोग पोकर और दिवाली पर पारंपरिक रूप से तीन पत्ती खेल सकते हैं। ये ऐप लोगों को पोकर या अन्य ताश के खेल परिवार और दोस्तों और यहां तक पेशेवरों के साथ खेलने का विकल्प दे रहे हैं।

पिछली दिवाली दो लाख हार चुके 29 वर्षीय व्यक्ति ने कहा कि ताश खेलने के लिए इस बार न्योता नहीं मिला ‘बड़ा झटका’ है।

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उन्होंने कहा, ‘‘ पिछली दिवाली से मैं खुद को समझा रहा हूं कि अगली दिवाली इस नुकसान की भरपाई कर लूंगा लेकिन कोरोना वायरस की वजह से मेरे पहचान वाला कोई भी ताश पार्टी की मेजबानी नहीं कर रहा है। मैंने कई लोगों को संपर्क किया यहां तक खुद ताश पार्टी करने की सोची लेकिन कहीं से सकारात्मक जवाब नहीं आया। हर कोई भयभीत है।’’

वहीं, ऐप हर किसी को उसकी जेब और पंसद के अनुसार पेशकश कर रहे हैं जिनमें मुफ्त में प्रवेश हासिल होने वाले टूर्नामेंट से लेकर पांच रुपये से 100 रुपये की शुरुआती कीमत पर खेल के टेबल पर बैठने का मौका, तीन लाख रुपये की दिवाली प्रतियोगिता पुरस्कार योजना में पंजीकृत कराने पर 50 रुपये का बोनस शामिल है।

समाज में जुए को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है लेकिन दिवाली पर इसके बारे में राय दूसरी है।

हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन देवी पार्वती ने चौसर के खेल में भगवान शिव से जीता था और कहा था कि जो भी दिवाली की रात जुआ खेलेगा उसके यहां पूरे साल समृद्धि बनी रहेगी।

बाजी गेम्स के सीईओ नवकिरण सिहं ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘ कोविड-19 महामारी की वजह से लोग घरों में रहने को मजबूर हुए हैं और इससे मनोरंजन के तरीके प्रभावित हुए हैं और लोग विकल्प तलाश रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में वृद्धि देखने को मिली है और हमारा मानना है कि यह अब और बढ़ेगा... हम उम्मीद करते हैं और प्रोत्साहित करते हैं कि इस त्योहार लोग सामाजिक दूरी का अनुपालन करने हुए ऑनलाइन खेलों का आनंद लें।

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