देश की खबरें | व्यक्ति को न्याय व्यवस्था को दूषित करने का कभी प्रयास नहीं करना चाहिए: उच्चतम न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अदालत में आये व्यक्ति को पाक साफ होना चाहिए और उसे ऐसे दस्तावेज दाखिल करके न्याय व्यवस्था को दूषित करने का कोई प्रयास नहीं करना चाहिए, जिनके बारे में वह जानता है कि यह फर्जी है।
नयी दिल्ली, 30 मार्च उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अदालत में आये व्यक्ति को पाक साफ होना चाहिए और उसे ऐसे दस्तावेज दाखिल करके न्याय व्यवस्था को दूषित करने का कोई प्रयास नहीं करना चाहिए, जिनके बारे में वह जानता है कि यह फर्जी है।
न्यायालय ने एक व्यक्ति को अवमानना का दोषी ठहराते हुए यह टिप्पणी की और उसे हिरासत में लेने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति यू. यू. ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि व्यक्ति ने शुरुआती चरण में ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और बिना शर्त माफी मांग ली है।
न्यायमूर्ति एस. आर. भट और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने मंगलवार को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘यह अच्छी तरह से निर्धारित है कि अदालत में आये व्यक्ति को पाक साफ होना चाहिए और उसे ऐसे दस्तावेज दाखिल करके न्याय व्यवस्था को दूषित करने का कोई प्रयास नहीं करना चाहिए, जिनके बारे में वह जानता है कि यह फर्जी है।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति को पिछले साल महाराष्ट्र में एक मामले के संबंध में संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था, उसने एक अर्जी दायर कर आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह का और समय मांगा था।
अर्जी के साथ, उसने दो डॉक्टरों के हस्ताक्षर के तहत एक प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट संलग्न की थी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि वह कोविड-19 से संक्रमित था।
पीठ ने कहा कि आत्मसमर्पण करने के लिए समय नहीं बढ़ाया गया और यह बताया गया कि उसके द्वारा संलग्न की गई रिपोर्ट फर्जी थी और संबंधित डॉक्टरों को नोटिस जारी किए गए।
पीठ ने कहा कि दोनों डॉक्टरों ने हलफनामा दायर किया था और कहा था कि उन्होंने उस व्यक्ति को कभी भी ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था और उसके द्वारा दायर की गई रिपोर्ट वास्तव में पिछले साल अप्रैल में एक महिला को जारी की गई थी।
शीर्ष अदालत ने तब उस व्यक्ति को नोटिस जारी किया था कि उसके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए।
पीठ ने कहा कि उस व्यक्ति ने शीर्ष अदालत में फर्जी चिकित्सा प्रमाण पत्र दाखिल करने के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए एक हलफनामा दायर किया है।
पीठ ने कहा कि उस व्यक्ति की ओर से पेश वकील के अनुरोध पर, उसे संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था।
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