देश की खबरें | मुंबई में 1993 में हुए दंगों से संबंधित मामले में एक व्यक्ति बरी
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मुंबई, 10 मई मुंबई में एक विशेष अदालत ने 1996 में हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में संदेह का लाभ देते हुए 46 साल के एक व्यक्ति को बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि हो सकता है कि वह निर्दोष राहगीर हो और दंगाई भीड़ में शामिल न रहा हो।
आरोपी शिवपूजन राजभर फरार था। 28 मार्च 2023 को उसे पकड़कर अदालत में पेश किया गया।
पुलिस ने हत्या के प्रयास और गैरकानूनी सभा के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत राजभर और दर्जनों अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.ए. कुलकर्णी ने चार मई को राजभर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
बुधवार को विस्तृत आदेश उपलब्ध कराया गया। मामले में अधिकतर अन्य आरोपियों को पहले ही बरी किया जा चुका है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजभर 30 साल पहले हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान लगभग 300 -400 लोगों की भीड़ में शामिल था, जिन्होंने एक-दूसरे पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी थीं।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष तीन गवाहों- दो पुलिसकर्मियों और एक पंच के साक्ष्य पर निर्भर रहा है।
न्यायाधीश ने कहा कि तीनों की गवाही के अलावा, “अपराध में अभियुक्तों की संलिप्तता को इंगित करने” के लिए कुछ भी पेश नहीं किया गया और अभियुक्तों की पहचान करने के लिए कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं है।
न्यायाधीश ने कहा, “यद्यपि तर्क के तौर पर यह माना जा सकता है कि वर्तमान आरोपी (राजभर) घटनास्थल पर मौजूद था, यह संभव हो सकता है कि वह एक निर्दोष तमाशबीन हो। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि आरोपी ने गैरकानूनी सभा में सक्रिय रूप से भाग लिया था।”
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