जरुरी जानकारी | बीते सप्ताह कम आपूर्ति से तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. बाजार में आयातित खाद्यतेलों की कम आपूर्ति की स्थिति के अलावा बारिश के मद्देनजर सोयाबीन, मूंगफली और बिनौला की बाजार में आवक में देरी के बीच बीते सप्ताह लगभग सभी तेल-तिलहनों के दाम में सुधार आया। सोयाबीन से काफी मंहगा होने के कारण कम आयात के बीच कच्चा पामतेल (सीपीओ) के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

नयी दिल्ली, आठ सितंबर बाजार में आयातित खाद्यतेलों की कम आपूर्ति की स्थिति के अलावा बारिश के मद्देनजर सोयाबीन, मूंगफली और बिनौला की बाजार में आवक में देरी के बीच बीते सप्ताह लगभग सभी तेल-तिलहनों के दाम में सुधार आया। सोयाबीन से काफी मंहगा होने के कारण कम आयात के बीच कच्चा पामतेल (सीपीओ) के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि बाजार में सोयाबीन, मूंगफली और बिनौला की आवक में देरी की संभावना के बीच खाद्यतेलों के कम आपूर्ति की स्थिति बनी हुई है और इसमें जल्द सुधार होने की संभावना भी कम नजर आ रही है। सोयाबीन तेल का पाईपलाईन अभी खाली है। सोयाबीन का आयात करने में भी 50-60 दिन का समय लगता है।

दूसरा, सीपीओ का दाम थोक में सोयाबीन से 60 डॉलर प्रति टन ऊंचा है और इतने मंहगे दाम पर कोई सीपीओ तेल कम ही मंगायेगा जिसके आयात में अपेक्षाकृत काफी कम समय लगता है। इस स्थिति को देखते हुए फिलहाल कम आपूर्ति की स्थिति बनी रहेगी। यह तेल-तिलहन में तेजी का एक प्रमुख कारण है।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह विदेशों में भारी गिरावट रही। सीपीओ का दाम पहले के 1,060-1,065 डॉलर प्रति टन से घटकर 1,045-1,050 डॉलर प्रति टन रह गया। इसी प्रकार सोयाबीन तेल का दाम पहले के 1,040-1,045 डॉलर प्रति टन से घटकर 985-990 डॉलर प्रति टन रह गया।

विदेशों में सोयाबीन के दाम लगभग 55 डॉलर प्रति टन टूटने के बावजूद देश के बजारों में कम आपूर्ति के कारण सोयाबीन सहित बाकी अन्य खाद्यतेलों के दाम में सुधार आया।

उन्होंने कहा कि सीपीओ का अपेक्षाकृत काफी कम आयात हो रहा है क्योंकि इसका दाम सोयाबीन तेल से लगभग पांच रुपये लीटर मंहगा बैठता है। सोयाबीन के आयात करने में लगभग 60 दिन लगते हैं जबकि सीपीओ आयात करने में 10-15 दिन लगते हैं। पर दोनों ही खाद्यतेलों की आपूर्ति-लाईन टूटी हुई है। इसकी वजह है कि आयातकों ने इस मौसम में स्थानीय फसल के आने की संभावना को देखते हुए आयात कम किया है। लेकिन बारिश के कारण फसलों के आने में देरी हो सकती है।

इसे देखते हुए आगे कम आपूर्ति की स्थिति बने रहने की संभावना है और आने वाले दिनों में गणेश चतुर्थी से शुरु होकर आगे त्योहार की मांग और बढ़ेगी। इससे खाद्यतेलों में तेजी बनी रह सकती है।

बीते शनिवार को सरसों की आवक भी पहले के साढ़े तीन लाख बोरी से घटकर लगभग 2.50 लाख बोरी रह गई। कच्ची घानी के तेल मिलों को सरसों के उम्दा किस्म की जरुरत होती है और इसके लिए वे बाजार से सरसों की खरीद करते हैं। इसके लिए उन्होंने सरसों के दाम भी बढ़ा कर बोले हैं जो सरसों तेल-तिलहन में सुधार का मुख्य कारण है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि सरकार को तेल-खल के लिए कोई सख्त कानून लाना होगा और खल के नकली कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए बिनौला खल पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाने के बारे में सोचना होगा जिसे फिलहाल इस कर से छूट मिली हुई है।

इस छूट की वजह से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में नकली खल का कारोबार बढ़ रहा है। गुजरात सरकार और गुजरात कपास संघ ने इसको लेकर चिंता भी जताई है पर फिलहाल इस नकली खल के कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार सूरजमुखी के उत्पादन को बढ़ाने के लिए पिछले लगभग 10 साल से सूरजमुखी का एमएसपी बढ़ाती आ रही है। मगर इसका बाजार नहीं होने के कारण सूरजमुखी का उत्पादन बढ़ने के बजाय घटता ही जा रहा है।

सरकार एमएसपी पर सूरजमुखी खरीद करती भी है तो बाद में उसे कम दाम पर बेचना पड़ता है और सूरजमुखी किसानों को सूरजमुखी की खपत के लिए सरकार पर निर्भरता के कारण उन्होंने धीरे धीरे सूरजमुखी की खेती ही छोड़ दी। क्योंकि सूरजमुखी पेराई मिलों को पेराई के बाद सूरजमुखी तेल का दाम लागत से कम मिलता था यानी उन्हें नुकसान होता है।

पेराई के बाद सूरजमुखी तेल की लागत बैठती है लगभग 150 रुपये लीटर और बाजार में लूज में इस तेल का दाम है 85-90 रुपये लीटर। जब किसी तेल का बाजार ही विकसित ना हो तो सरकार की खरीद का कोई फायदा नहीं होगा।

इसी तरह अगर सरकार सारे का सारा सोयाबीन फसल खरीद भी ले तो उसका कोई फायदा नहीं निकलेगा। जब तक निर्यात के लिए सोयाबीन डीओसी के दाम प्रतिस्पर्धी नहीं होंगे तो सोयाबीन डीओसी बिकेगा ही नहीं। इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार को सब्सिडी देने के बारे में विचार करना होगा। सोयाबीन का नया एमएसपी 4,892 रुपये क्विंटल है और लूज में 4,200-4,400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर भी लिवाल मुश्किल से मिल रहे हैं।

बीते सप्ताह सरसों दाने का थोक भाव 35 रुपये बढ़कर 6,310-6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों दादरी तेल का भाव 125 रुपये बढ़कर 12,525 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 25-25 रुपये की मजबूती के साथ क्रमश: 2,010-2,110 रुपये और 2,010-2,125 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और लूज का भाव क्रमश: 70-70 रुपये की मजबूती के साथ क्रमश: 4,740-4,770 रुपये प्रति क्विंटल और 4,540-4,675 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

इसी प्रकार सोयाबीन दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के दाम क्रमश: 50 रुपये, 50 रुपये और 100 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 10,625 रुपये, 10,225 रुपये तथा 8,850 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में भी सुधार का रुख रहा। मूंगफली तिलहन 150 रुपये की मजबूती के साथ 6,700-6,975 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 325 रुपये के सुधार के साथ 15,850 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल का भाव 50 रुपये के सुधार के साथ 2,385-2,685 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

सोयाबीन से मंहगा होने के बीच कम आयात के कारण कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का दाम 9,425 रुपये प्रति क्विंटल पर पूर्ववत बंद हुआ। जबकि पामोलीन दिल्ली का भाव 125 रुपये के सुधार के साथ 10,650 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव 125 रुपये के सुधार के साथ 9,850 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

नाममात्र स्टॉक के बीच मांग निकलने से बिनौला तेल 350 रुपये के सुधार के साथ 10,450 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

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