देश की खबरें | गुजरात में स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण बढ़ा: भाजपा ने सराहा, कांग्रेस ने "धोखा" बताया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने मंगलवार को एक आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों, नगर पालिकाओं और नगम निगमों जैसे निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की, जिससे इन निकायों के चुनाव का रास्ता साफ हो गया।
गांधीनगर, 29 अगस्त गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने मंगलवार को एक आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों, नगर पालिकाओं और नगम निगमों जैसे निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की, जिससे इन निकायों के चुनाव का रास्ता साफ हो गया।
गुजरात सरकार के इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल एवं अन्य भाजपा नेताओं ने जहां इस कदम की सराहना की, वहीं कांग्रेस ने इस कदम को ओबीसी समुदाय के सदस्यों को "धोखा" देने का प्रयास बताया।
पटेल और भाजपा की गुजरात इकाई के अध्यक्ष सी आर पाटिल ने कहा कि इस फैसले का मकसद समाज के सभी तबकों को एक साथ रखना है। लेकिन कांग्रेस विधायक दल के नेता अमित चावड़ा ने इस फैसले को ओबीसी समुदाय के सदस्यों को "गुमराह करने और धोखा देने" का भाजपा का प्रयास बताया। उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं को इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी।
आम आदमी पार्टी (आप) की गुजरात इकाई के अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा कि ओबीसी समुदाय द्वारा आरक्षण के मुद्दे पर एकजुट होकर मोर्चा खोलने के बाद यह कदम उठाया गया, क्योंकि भाजपा को आगामी लोकसभा चुनावों में उनका समर्थन खोने का डर था।
मुख्यमंत्री पटेल ने राज्य भाजपा मुख्यालय ‘कमलम’ में पाटिल के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने हमेशा विभिन्न जातियों, समुदायों और धर्मों के लोगों को एकजुट कर आगे बढ़ने का प्रयास किया है। स्थानीय निकायों में ओबीसी समुदाय को 27 प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराने का फैसला उसी प्रयास की दिशा में है।”
प्रदेश भाजपा मुख्यालय में पटाखे फोड़कर फैसले का स्वागत किया गया।
पटेल ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की भी व्यवस्था की गई है कि गैर-ओबीसी समुदाय इन आरक्षण उपाय से प्रभावित नहीं हों।
इससे पहले, गुजरात में स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण 10 प्रतिशत था। न्यायमूर्ति झावेरी आयोग की रिपोर्ट पर आधारित यह घोषणा लोकसभा चुनाव से पहले की गई है और इससे स्थानीय निकाय चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त होगा, जो लंबित कोटा मुद्दे के कारण स्थगित कर दिए गए थे, क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि ओबीसी के लिये आरक्षण उनकी आबादी के आधार पर होना चाहिये।
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