जम्मू, 24 अप्रैल कांग्रेस की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष विकार रसूल वानी ने सोमवार को कहा कि पुंछ में सेना के एक वाहन पर हाल में हुए आतंकी हमले पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी में कुछ भी गलत नहीं है।
वानी ने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा हाल में किए गए खुलासे से भाजपा का "फर्जी राष्ट्रवाद" उजागर हो गया है जो विशेष रूप से 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के संबंध में था और इसकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि फारूक (अब्दुल्ला) साहब ने कुछ गलत कहा है। सुरक्षाबलों की शहादत सुरक्षा चूक के चलते हुई। पहले कहा गया कि (पुंछ में) सेना के वाहन पर आकाशीय बिजली गिरी और बाद में इस बात की पुष्टि हुई कि आतंकवादी हमला हुआ है।’’
वह अब्दुल्ला के उस बयान को लेकर भाजपा की आलोचना के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें कहा गया था कि शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों को उन खामियों की जांच करनी चाहिए, जिसके कारण आतंकवादी हमले में पांच सैनिक शहीद हो गए।
अब्दुल्ला ने कहा था, ‘‘वह क्षेत्र (जहां हमला हुआ) सीमा के करीब है। वहां सुरक्षा चूक हो सकती है, जिसकी उन्हें जांच करने की जरूरत है। कहीं न कहीं गलती हुई है, उन्हें इस पर गौर करना चाहिए... उन्होंने पुंछ में अभियान शुरू कर दिया है और उन्हें निर्दोष लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए या गिरफ्तार नहीं करना चाहिए।’’
भाजपा ने अब्दुल्ला के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने कहा, ‘‘अब्दुल्ला ने जांच एजेंसियों पर पुंछ आतंकवादी हमले की जांच के नाम पर आम लोगों को परेशान करने का आरोप लगाया। उन्हें लोगों को गुमराह नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें लोगों को दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के वास्ते जांच में शामिल होने के लिए कहना चाहिए।’’
वानी ने कहा कि फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले पर मलिक के हालिया सनसनीखेज खुलासे के बाद लोग सोच रहे हैं कि उस घातक घटना के पीछे कौन था जो हो सकता है कि चुनावी लाभ के लिए किया गया हो।
पुलवामा हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवानों शहीद हो गए थे।
जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के अध्यक्ष वानी ने मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुप्पी पर खेद जताते हुए कहा, ‘‘चीजों को स्पष्ट करने के लिए जांच होनी चाहिए।’’
वानी ने कहा कि कांग्रेस ने पुंछ हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, ‘‘हमने पांच सैनिकों को खो दिया ... मैं जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे बनिहाल में रह रहा हूं और अगर हम तलाशी या सड़क गश्त बंद कर दें, तो कुछ भी हो सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है, तो राजमार्ग पर विस्फोट करने के कई आतंकी प्रयासों को समय पर विस्फोटक उपकरणों का पता लगाकर विफल किया गया है। इसलिए जब (आतंकवादियों की) गतिविधि के बारे में सूचना मिलती है, तो सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।’’
वानी ने यह भी कहा कि गांधी-नेहरू परिवार के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों- इंदिरा गांधी और उनके बेटे राजीव गांधी की आतंकवाद के चलते जान चली गई, जबकि पिछले तीन दशकों में जम्मू कश्मीर में कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की आतंकवादियों द्वारा हत्या कर दी गई।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे (भाजपा) हमें आतंकवाद के लिए दोषी ठहराते हैं, तो यह उनकी हताशा है। हमने आतंकवाद का सामना किया है और इसके खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।’’
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर पिछले नौ वर्षों में राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि पुलवामा आतंकी हमले के बारे में मलिक के खुलासे ने भाजपा के ‘‘नकली राष्ट्रवाद’’ को उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह (मलिक) सच कह रहे हैं और लोग अब भाजपा को अच्छी तरह से समझते हैं। वह दिन दूर नहीं जब कांग्रेस देशभर में एक बार फिर मजबूत होकर उभरेगी। हम कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करेंगे और जम्मू कश्मीर में भी नंबर एक बनकर उभरेंगे।’’
इस बीच, जिला विकास परिषद (डीडीसी) के सदस्य (कुलगाम) अनायतुल्लाह राथेर गुलाम नबी आज़ाद के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी (डीपीएपी) का साथ छोड़कर कांग्रेस में लौट आए।
वानी ने कहा, ‘‘जेकेपीसीसी के पूर्व महासचिव राथेर, आज़ाद के प्रभाव में उनकी नयी पार्टी के संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल हुए थे। जो भी उनके साथ गए थे वे सभी वापस लौट रहे हैं क्योंकि उनकी विचारधारा धर्मनिरपेक्ष है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि डीपीएपी आंतरिक रूप से भाजपा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यह तब काफी स्पष्ट हो गया जब आज़ाद ने हाल ही में आरएसएस और भाजपा के इशारे पर मोदी की प्रशंसा की और राहुल गांधी का विरोध किया।
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