नयी दिल्ली, चार दिसंबर सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि नीति आयोग ने समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 6.0 (सीडब्ल्यूएमआई) की संयुक्त रिपोर्ट जारी करने के लिए कुछ प्रमुख निष्पादन संकेतकों (केपीआई) के आंकड़े जिला स्तर पर एकत्र करने का निर्णय लिया है।
योजना, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग 2018 से सीडब्ल्यूएमआई का प्रकाशन कर रहा है और अब तक, दो संस्करण (जून 2018) और (अगस्त 2019) प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूएमआई का अगला संस्करण कोविड-19 स्थिति के कारण देरी से अगस्त 2022 में तैयार किया गया था।
सिंह ने कहा कि संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ उचित विचार-विमर्श के बाद, सीडब्ल्यूएमआई का दायरा जिला स्तर तक बढ़ा दिया गया था और आंकड़ों की बारीकी को बढ़ाने के लिए, यह निर्णय लिया गया कि कुछ केपीआई के लिए आंकड़े जिला स्तर पर एकत्र किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, "इसलिए, यह विचार किया गया कि सीडब्ल्यूएमआई 6.0 तक के संस्करणों की एक संकलित रिपोर्ट जारी की जानी चाहिए।"
सिंह ने कहा कि किसी भी क्षेत्र या देश की औसत वार्षिक जल उपलब्धता काफी हद तक जल-मौसम विज्ञान और भूवैज्ञानिक कारकों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, "भारत के संदर्भ में, प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता मुख्य रूप से जनसंख्या में हुई वृद्धि के कारण कम हो रही है। प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक जल उपलब्धता 2011 में 1,545 घन मीटर और 2021 में 1,486 घन मीटर आंकी गई है।"
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY