देश की खबरें | एनआईए ने पीएफआई कैडर के साथ कथित संबंध को लेकर दो और लोगों को पकड़ा

पटना, पांच फरवरी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने बिहार पुलिस के सहयोग से रविवार को प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के फुलवारीशरीफ से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में प्रदेश के मोतिहारी से दो और लोगों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पूर्वी चंपारण जिले के रहने वले तनवीर रजा और मो आबिद के रूप में हुई है।

शनिवार को एनआईए और बिहार पुलिस की एक संयुक्त टीम ने मोतिहारी में पीएफआई से जुड़े होने के संदेह में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।

एनआईए की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन गिरफ्तारियों के साथ सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने को एक पीएफआई मॉड्यूल की साजिश रचने का पता चला है ।

इसमें कहा गया है कि बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में शनिवार को लक्षित हत्या करने के लिए पीएफआई कैडरों द्वारा रची गई साजिश को विफल करने के लिए आठ स्थानों पर छापेमारी की गयी ।

बयान में कहा गया है कि एनआईए ने रविवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने हत्या को अंजाम देने के लिए हथियारों और गोला-बारूद की व्यवस्था की थी, वारदात को अंजाम देने के लिये रेकी पहले ही की जा चुकी थी।

इसके अनुसार, हथियार और गोला-बारूद एक पीएफआई ट्रेनर याकूब को सौंपे गए थे, जो पीएफआई कैडरों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर रहा था।

एनआईए के अधिकारियों ने शनिवार को मोतिहारी में छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण बरामद किए।

बयान में कहा गया है कि कुछ दिन पहले पीएफआई के ट्रेनर याकूब ने एक भड़काऊ वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया था, जिसका उद्देश्य शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ना था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सितंबर 2022 में एक अधिसूचना के माध्यम से आतंकवादी समूहों और विध्वंसक गतिविधियों से जुड़े होने के कारण पीएफआई और उसके सहयोगियों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।

केंद्र ने अधिसूचना में कहा था कि प्रतिबंध की सिफारिश उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात की राज्य सरकारों ने की थी।

प्रतिबंध के कारणों की व्याख्या करते हुए, गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया था कि पीएफआई और उसके सहयोगी देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए हानिकारक गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

गौरतलब है कि एनआईए ने पिछले साल देश के विभिन्न हिस्सों से पीएफआई से जुड़े करीब 350 लोगों को गिरफ्तार किया था।

केंद्रीय जांच एजेंसियों को संगठन के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले, जिसके आधार पर संगठन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया।

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