देश की खबरें | एनजीटी ने कुशक नाले में सीवेज, जहरीली गैस के मुद्दे को हल करने के लिए समिति गठित की

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नयी दिल्ली, 21 मई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि वैज्ञानिक रूप से सीवर के शोधन और इस्तेमाल की जिम्मेदारी वैधानिक प्राधिकारियों की है और उसने दक्षिणी दिल्ली के कुशक नाले से दूषित जल तथा जहरीली गैस निकलने के मुद्दे को हल करने के लिए एक समिति गठित की है।

एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें ग्रेटर कैलाश-1 के बी ब्लॉक में मकानों के समीप नाले की देखरेख में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायाधीश ए के गोयल की पीठ ने कहा कि शिकायतों का समाधान होना चाहिए लेकिन किसी नाले को ढकने की अनुमति तभी दी जा सकती है जब सीवर के पानी की निकासी वाली एक उचित अलग पाइपलाइन हो और नहर में केवल बरसाती पानी जाता हो जो कि यहां नहीं हुआ।

पीठ में न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल रहे।

पीठ ने कहा, ‘‘आवेदकों ने खुद कहा है कि नाले को ढकने से जहरीली गैस एकत्रित हो गयी है जो कुछ मकानों के पीछे नाले के बिना ढके हिस्सों से निकलती है। अत: इन परिस्थितियों में नाले को ढकने की अनुमति देना उचित नहीं होगा।’’

दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों से 6.5 किलोमीटर लंबे कुशक नाले में बरसाती पानी और सीवर का पानी जाता है तथा यह यमुना नदी में जाने से पहले निजामुद्दीन पश्चिम के समीप बारापूला नाले से मिलता है।

एनजीटी ने कहा कि नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को सिद्ध करने के लिए सीवर के पानी का नियमों के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से शोधन और इस्तेमाल नगर निगम और दिल्ली जल बोर्ड जैसे वैधानिक प्राधिकारियों की जिम्मेदारी है।

उसने कहा कि इसका हल सीवर के पानी को नाली में जाने से रोकना तथा समय-समय पर इसकी सफाई करना है जिसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि इसमें जल जमाव ना हो।

एनजीटी ने कहा, ‘‘इसके अनुसार, हम निर्देश देते हैं कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली नगर निगम की एक समिति इस मामले पर गौर करें और यह सुनिश्चित करते हुए इस मुद्दे को हल करें कि सीवर का पानी छोड़े जाने के कारण नाले से कोई जहरीली गैस न निकले।’’

इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तारीख तय की गयी है।

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