देश की खबरें | अवसाद रोधी दवा इतिहास वाले नए-नए पिता बने लोगों में पुन: औषधि इस्तेमाल का 30 गुना अधिक जोखिम

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. यदि नए-नए पिता बने लोगों का अवसाद रोधी दवाएं लेने का हालिया इतिहास रहा हो, तो बच्चे के जन्म के बाद पहले वर्ष में संबंधित व्यक्ति को अवसाद रोधी दवाएं फिर से लेने की संभावना 30 गुना अधिक होती है। यह बात एक अध्ययन में कही गई है।

नयी दिल्ली, 15 जुलाई यदि नए-नए पिता बने लोगों का अवसाद रोधी दवाएं लेने का हालिया इतिहास रहा हो, तो बच्चे के जन्म के बाद पहले वर्ष में संबंधित व्यक्ति को अवसाद रोधी दवाएं फिर से लेने की संभावना 30 गुना अधिक होती है। यह बात एक अध्ययन में कही गई है।

ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, अवसाद और पितृत्व के बीच जटिल संबंध को दर्शाने वाले निष्कर्षों से पता चलता है कि अवसाद रोधी दवाओं के उपयोग संबंधी इतिहास की बच्चे के जन्म के बाद के वर्ष में संबंधित दवाओं के पुन: उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

अध्यन रिपोर्ट के मुख्य लेखक होली स्मिथ ने कहा, "ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पुरुष बच्चे के जन्म से पहले चल रहे उपचार को जारी रख रहे हों, या ऐसे पुरुष फिर से अवसाद की भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं और नए बच्चे के जन्म संबंधी चुनौतियाँ इसे बढ़ा सकती हैं।"

अध्ययन में पड़ताल की गई कि विभिन्न श्रेणियों में से प्रत्येक श्रेणी में कितने पुरुषों ने अवसाद रोधी दवा का इस्तेमाल किया था।

‘जेएएमए नेटवर्क ओपन’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि नए-नए पिता बने लोगों के अवसाद रोधी दवाएं लेने के पीछे सामाजिक अभाव एक प्रमुख कारक है।

अध्ययन में पाया गया कि सबसे वंचित क्षेत्रों में रहने वाले पिताओं को सबसे कम वंचित क्षेत्रों में रहने वाले पिताओं की तुलना में अवसाद रोधी दवाओं का जोखिम 18 प्रतिशत अधिक था।

पिछले अध्ययन में कहा गया था कि बच्चे के जन्म के बाद पुरुषों में अवसाद का खतरा अधिक होता है, जिसकी संभावना 10 में से एक के आसपास होती है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\