ताजा खबरें | न्यायपालिका में ‘बड़ी मछलियों’ को पकड़ने के लिए आवश्यक प्रावधान की आवश्यकता : कार्ति चिदम्बरम

नयी दिल्ली, चार दिसम्बर कांग्रेस ने न्यायपालिका को दलालों से पूरी तरह मुक्त करने के लिए ‘बड़ी मछलियों’ को पकड़ने के लिए आवश्यक प्रावधान करने की सोमवार को आवश्यकता जताई।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदम्बरम ने अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2023 पर लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा कि छोटी अदालतों में छोटे-मोटे दलालों के खिलाफ पहल करने के साथ-साथ केंद्र को ‘बड़ी मछलियों’ को पकड़ने के लिए प्रावधान करना चाहिए।

चिदम्बरम ने कहा कि ‘बिचौलिया’ भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं। उन्होंने शादी-विवाह से लेकर हर मामले में बिचौलियों की मौजूदगी का जिक्र करते हुए कहा कि यहां तक कि राजनीति में भी ‘बिचौलिया’ हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक के समर्थन में है, लेकिन जटिल विधिक प्रक्रिया और सामाजिक असमानता के कारण दलाल पैदा होते हैं।

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपनी उपयोगिता खो चुके ‘सभी अप्रचलित कानूनों या स्वतंत्रता-पूर्व अधिनियमों’ को निरस्त करने के केंद्र सरकार के प्रयास के आलोक में लोकसभा में अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक विचार एवं पारित किये जाने के लिए पेश किया।

यह विधेयक राज्य सभा से पहले ही पारित हो चुका है।

सरकार ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के परामर्श से लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879 को निरस्त करने और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन करने का निर्णय लिया है।

विधेयक का उद्देश्य ‘अनावश्यक अधिनियमों’ की संख्या कम करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में ‘लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879’ की धारा 36 के प्रावधानों को शामिल करना है।

यह धारा अदालतों में दलालों की सूची तैयार करने और प्रकाशित करने की शक्ति प्रदान करती है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)