पुणे, 31 जुलाई अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाली कार्यकर्ता नंदनी जाधव के लिए महिलाओं और लड़कियों की ‘‘पवित्र’’ जटा काटना आसान काम है। हालांकि, इस काम के लिए महिलाओं और उनके परिवार को तैयार करना बेहद मुश्किल साबित होता है।
जाधव कहती हैं कि जटा को काटने के लिए कैंची उठाने से पहले महिलाओं और लड़कियों को यह समझाना मुश्किल होता है कि उलझे हुए बालों या जटा को बढ़ाना अंधविश्वास से ज्यादा कुछ नहीं है। नंदिनी जाधव अब तक करीब 250 बार ऐसा कर चुकी हैं।
हिंदू धर्म के कई अनुयायी अपने विश्वास के अनुसार जटा रखते हैं क्योंकि उनका मानना है कि ऐसे बाल पवित्र होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जटा एक दैवीय चीज है और इसे काटने से देवी-देवताओं के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।
जाधव ने कहा, ‘‘ आमतौर पर, उलझे हुए बालों के कारण उन्हें स्वच्छ रखना, कंघी करके संवारना और देखभाल करना मुश्किल होता है। जटा पाया जाना अंधविश्वास से जुड़ा हुआ है, क्योंकि माना जाता है कि इस तरह के उलझे हुए बाल आशीर्वाद हैं और उन्हें काटने से देवी के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।’’
पेशे से ब्यूटीशियन जाधव महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (एमएएनएस) की एक सक्रिय सदस्य हैं। एमएएनएस पहले डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के नेतृत्व में कार्यरत थीं, जिनकी अगस्त 2013 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
जाधव ने कहा, ‘‘डॉ. दाभोलकर की मृत्यु के बाद मैं एमएएनएस में शामिल हुई। कुछ वर्षों तक अंधविश्वास विरोधी मिशन से जुड़े रहने के बाद, मैंने उलझे हुए बालों से जुड़े अंधविश्वास से लड़ने के लिए अपनी पेशेवर विशेषज्ञता का उपयोग करने का फैसला किया।’’
जाधव ने कहा कि 2014-15 में उनकी मुलाकात एक बैंक प्रबंधक की पत्नी से हुई, जिनकी जटा थी। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम उनके परिवार के सदस्यों से मिले, जो शिक्षित थे, तो वे यह कहते हुए जटा कटाने के लिए तैयार नहीं हुए थे कि अगर वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। हमें पता चला कि महिला के उलझे हुए बालों के कारण पति के साथ उनका रिश्ता तनावपूर्ण था।’’
उन्होंने कहा कि घंटों के परामर्श के बाद आखिरकार परिवार जटा को काटने के लिए राजी हो गया और आज वे एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं।
वहीं, पुणे में काम करने वाली शिल्पा ने कहा कि उनकी मां ने हाल ही में 20 साल बाद उलझे बालों से छुटकारा पाया और आज वह एक सामान्य जीवन जी रही हैं।
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