देश की खबरें | नायडू ने मजबूत, एकीकृत राष्ट्र निर्माण के लिए एक अभियान का किया आह्वान
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नयी दिल्ली, नौ अगस्त उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने एक मजबूत और भावनात्मक रूप से एकीकृत राष्ट्र बनाने के लिए एक अभियान चलाने का रविवार को आह्वान किया।
नायडू ने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ पर एक फेसबुक पोस्ट लिखा जिसमें उन्होंने 1000-1947 के दौरान श्रृंखलाबद्ध विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक शोषण का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि देश ने दूसरी सहस्राब्दी के दौरान, सांस्कृतिक दमन और आर्थिक शोषण के रूप में बहुत भारी कीमत चुकायी, जिसने समृद्ध भारत को कमजोर किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1947 में मिली आजादी सिर्फ 200 साल के औपनिवेशिक शासन को खत्म करने के लिए नहीं बल्कि 1000 साल के ‘‘अंधकारमय युग’’ को समाप्त करने के लिए भी थी, जिस दौरान आक्रमणकारियों, व्यापारियों और उपनिवेशवादियों द्वारा देश को लूटा गया था जिन्होंने भारतीयों में एकता की कमी का फायदा उठाया।
उन्होंने कहा कि एक-दूसरे से संबंधित होने और एकता की कमी के कारण भारत को लंबे समय तक अधीनता और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
नायडू ने कहा कि इससे सीख लेते हुए, सभी भारतीयों को अपने संबंधित सांस्कृतिक मूल्यों और लोकाचार का पालन करते हुए भारतीयता की साझा भावना से बंधने की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, एकीकृत और भावनात्मक रूप से एकजुट भारत उन लोगों से सबसे अच्छा बचाव है, जो संदिग्ध इरादों से हम पर बुरी नज़र डालते हैं।
नायडू ने सभी के लिए समानता और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करके भारत को एकता के धागे में पिरोने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि एक विभाजित और अधूरा समाज सभी भारतीयों का उनकी क्षमता के अनुसार संपूर्ण विकास संभव नहीं कर सकता।
नायडू ने विदेशी आक्रमणों के प्रतिकूल प्रभावों के विस्तार में जाते हुए कहा कि इसके कारण वर्ष 1000 के बाद से देश की संपत्ति लूटी गई। उन्होंने सोमनाथ मंदिर तोड़े जाने और लंबे समय बाद स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत उसके पुनर्निर्माण और अयोध्या में करीब 500 वर्षों बाद राम मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू होने उल्लेख किया।
2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने के जश्न का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने लोगों से गरीबी, अशिक्षा, असमानता, लैंगिक भेदभाव, भ्रष्टाचार और सभी प्रकार की सामाजिक बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
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